सड़क-बिजली का इंतजार करते-करते दुनिया छोड़ गईं 110 वर्षीय आदर्श मतदाता

सैंज
    फाइल फोटो
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    जिला कुल्लू के दुर्गम क्षेत्र शाक्टी-मरौड़ में आज तक न तो सड़क पहुंची और न ही बिजली। गांव में विकास कार्यों की आस में हर बार उत्साह के साथ मतदान करने वाली सबसे उम्रदराज महिला 110 वर्षीय शाढ़ी देवी ने आंखें मूंद ली हैं। उनके निधन के साथ उनके घर में बिजली का बल्ब टिमटिमाने और राशन व बीमार को वाहन से लाने-ले जाने का सपना अधूरा रह गया।

    बता दें कि गाड़ापारली के शाक्टी-मरौड़ गांव ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क क्षेत्र में आता है। पिछले साल पहले एनजीओ ने सोलर लाइटें लगाईं हैं लेकिन घर के भीतर आज भी लोग अंधेरे में गुजर बसर करने को मजबूर हैं। सैंज में 820 मेगावाट की पार्वती-3,520 मेगावाट की पार्वती-2 और 100 मेगावाट की सैंज परियोजना समेत पांच बिजली प्रोजेक्ट हैं।

    जल विद्युत परियोजनाओं की नगरी सैंज घाटी के इस गांव में सरकारी सुविधा के नाम पर मात्र एक प्राथमिक पाठशाला है। मिडल की पढ़ाई के लिए नौनिहाल हर रोज 8 किलोमीटर पैदल जाते हैं और 8 किलोमीटर वापस आते हैं। गांव से सड़क अभी भी 30 किलोमीटर दूर है। जिला की सबसे उम्रदराज मतदाता शाढ़ी देवी के कारण इस बार के लोस चुनाव में यह गांव सुर्खियों में आया था।जिला प्रशासन ने शाढ़ी देवी को आदर्श मतदाता बनाकर पुरस्कृत भी किया था। उम्र के अंतिम पड़ाव में शाढ़ी देवी ने दो टूक कहा था कि विकास करवाओ, वरना वोट नहीं मिलेंगे। सरकार से कहती रहीं कि पथरीली डगर, खूंखार जंगली जानवर और मौसम के मिजाज को देखते हुए सड़क और बिजली की सुविधा मिलनी चाहिए। शाढ़ी देवी की ताउम्र जिंदगी लकड़ी की शोली की रोशनी में निकल गई।

    बिजली के बल्ब जलने की उम्मीद शाढ़ी देवी को अंतिम सांस तक रही। मरौड़ गांव की फूला देवी, डोला सिंह, राम लाल, लगन चंद, हरादासी, तेज राम, भाग चंद, गोविंद, राम चंद, जीत राम, दुर्गी देवी और शुकरी देवी ने बताया कि शाढ़ी देवी देवता की सच्ची भगत थी।

    बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी, पूर्व सांसद महेश्वर सिंह, जिला परिषद अध्यक्ष रोहिणी चौधरी, कांग्रेस नेता अदित्य विक्रम सिंह, बंजार कांग्रेस अध्यक्ष दुष्यंत ठाकुर और जिला भाजपा उपाध्यक्ष ओम प्रकाश ठाकुर ने निधन पर शोक जताया है। विधायक शौरी ने कहा कि सड़क निर्माण के लिए हाल ही में टीम ने दौरा किया है। बिजली के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

    क्या कहा था
    लोस चुनाव के दौरान शाढ़ी देवी ने अमर उजाला को बताया था कि वह हर बार इस उम्मीद से मतदान करतीं है कि गांव तक सड़क का निर्माण होगा और बिजली के तार बिछेंगे। हालांकि मरौड़ गांव को आठ वर्ष पहले प्राथमिक पाठशाला के रूप में बड़ा तोहफा मिला था, लेकिन स्कूल का दर्जा नहीं बढ़ा।

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