सड़क नहीं पहुंची तो जीवन पर संकट

बीते वर्ष अक्तूबर माह में सरपाणी गांव की हीरा देवी पेड़ पर घास काटने के दौरान अचानक गिर गई। हीरा के पांव, चेहरे और हाथ पर गंभीर चोटें आई। सड़क सुविधा न होने से उन्हें चारपाई से 10 पैदल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घाट में भर्ती कराया गया। तब जाकर उसकी जान बच पाई।

गत वर्ष अप्रैल माह में सरपाणी गांव के ही गबर सिंह को भालू ने मार दिया था। गांव तक 10 किमी की पैदल चढ़ाई चढ़ने के लिए न तो वन विभाग के अधिकारी तैयार हुए और ना ही राजस्व पुलिस की टीम गांव में गई। दो दिन बाद भी गबर का शव जंगल में पड़ा रहा तो ग्रामीणों ने डीएम से क्षेत्र में टीम भेजने की मांग की। तब जाकर तीसरे दिन मृतक के शव का पंचनामा व पोस्टमार्टम हो पाया
गोपेश्वर। ये दो उदाहरण बताते हैं कि गांवों में सड़क न पहुंचने से लोग किस तरह कठिन जीवन जीरहे हैं। अटल आदर्श ग्राम उस्तोली को वर्ष 2009 में 10 किमी घाट-उस्तोली-लांखी सड़क निर्माण के लिए शासन से हरी झंडी मिली थी। लोनिवि कर्णप्रयाग का काम पांच वर्ष बाद भी सड़क सर्वे और वन भूमि प्रक्रिया से आगे नहीं बढ़ पाया है। ऐसे में ग्रामीण आज भी पगडंडियों के सहारे 10 किमी की पैदल दूरी नापकर अपने गंतव्य को जा रहे हैं। उस्तोली गांव को अटल आदर्श ग्राम का नाम देना आज बेमानी साबित हो रहा है।

सड़क निर्माण में बांज के करीब 70 पेड़ आ रहे हैं। वन विभाग के चीफ कंजरवेटर की ओर से सड़क के सर्वे का स्थलीय निरीक्षण किया जाना है। सड़क निर्माण के लिए शासन से हमें 367.50 लाख की धनराशि भी मिल गई है। – प्रत्युष कुमार, ईई, लोनिवि, कर्णप्रयाग (चमोली)।

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