सड़क के लिए उजाड़ा, नहीं दिया मुआवजा

उत्तरकाशी। आपदा में तबाह हुए गंगोत्री राजमार्ग पर यातायात बहाली के लिए तीन वर्ष पहले बीआरओ और प्रशासन के झांसे में आए प्रभावितों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। बीआरओ द्वारा लाखों की परिसंपत्तियाें पर बुलडोजर चलवाने के बावजूद इन्हें एक धेला भी मुआवजा नहीं दिया।
अगस्त 2010 में भटवाड़ी बाजार का बड़ा हिस्सा भूधंसाव की भेंट चढ़ गया था। जिससे 39 घर तथा 42 दुकानों के साथ ही राजमार्ग का करीब 100 मीटर हिस्सा तबाह हुआ था। बीआरओ और प्रशासन ने यहां आठ भवनों पर बुलडोजर चलवाकर यातायात चालू किया। इस मलबे को नदी की ओर उड़ेलने से चार अन्य मकान ध्वस्त हुए। तब प्रभावितों को समुचित मुआवजे का आश्वासन दिया गया था। घटना के तीन वर्ष बाद भी उन्हें मुआवजे के नाम पर धेला भी नहीं मिला। प्रभावितों ने डीएम को पत्र लिखकर दो हफ्ते में भुगतान न मिलने पर गंगोत्री राजमार्ग पर चक्काजाम और भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।

प्रभावित लोग
मूर्तिराम रतूड़ी, जगतराम रतूड़ी, सुंदर सिंह पोखरियाल, शिव सिंह, कुंदन सिंह पोखरियाल, महेंद्र पोखरियाल, अवतार सिंह, पद्मा देवी, भंगीरी देवी, कामेश्वर प्रसाद, हबीब बट्ट, भूषण लाल, मनोज पंवार, प्रकाश लाल।

कोट-
बीआरओ द्वारा ढहाया गया भवन ही हमारे परिवार के सिर छिपाने का ठिकाना तथा आजीविका का आधार था। मुआवजे के लिए दर-दर भटक कर तंग आ चुके हैं। दो हफ्ते में कार्रवाई नहीं हुई तो राजमार्ग पर चक्काजाम कर भूख हड़ताल करेंगे।- जगतराम रतूड़ी और मूर्तिराम रतूड़ी, प्रभावित भटवाड़ी।

बीआरओ और प्रशासन ने मुआवजे का आश्वासन देकर राष्ट्रहित में हमारे भवन तुड़वाए। यदि मुआवजा नहीं मिला तो प्रभावित राजमार्ग के लिए कब्जाई गई अपनी जमीन पर फिर से मकान दुकान खड़ी करने पर विचार करेंगे।- महेंद्र पोखरियाल, प्रभावित भटवाड़ी।

प्रशासन ने भटवाड़ी के प्रभावितों के मुआवजे का 91.48 लाख का प्रस्ताव वर्ष 2011 में ही बीआरओ को सौंप दिया था। अब यह बीआरओ के स्तर पर लंबित है।- डा.आर.राजेश कुमार, डीएम उत्तरकाशी

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