सजना है मुझे ‘सजना’ के लिए

अल्मोड़ा। पर्वतीय क्षेत्र में भी अब करवा चौथ का पर्व मनाने की परंपरा बढ़ती जा रही है। करवा चौथ से एक दिन पूर्व महिलाओं ने बाजार से पूजा सामग्री की खरीददारी की। पूरे दिन बाजार में काफी भीड़ रही। करवाचौथ को देखते हुए बाजार में नई डिजाइनों में अलग-अलग क्वालिटी की चूड़ियां सजी हुई हैं। महिलाएं करवा चौथ पर विशेष श्रृंगार करती हैं। वह सौंदर्य में किसी से कम न रह जाएं इसलिए जमकर खरीदारी कर रही हैं।
करवा चौथ मंगलवार को मनाया जा रहा है। करवा चौथ के एक दिन पूर्व महिलाओं ने बाजार से पूजा सामग्री समेत सुहाग से जुड़ी सामग्री की खरीददारी की। करवा चौथ को देखते हुए बाजारों में नई डिजाइनों में चूड़ियां, गले के हार और अन्य सामग्री सजाई गई है। कई ब्रांडेड चूड़ियों का पैकेट 200 से 500 रुपये की कीमत में तक उपलब्ध था। गले का हार 450 से एक हजार रुपये तक मिल रहा है। इसके अलावा कई नई डिजाइनों की साड़ियां भी बिक्री के लिए लगाई गई हैं। करवा चौथ की पूजा सामग्री बेच रहे तरुण धवन और शुभम राज ने बताया कि सोमवार को काफी अच्छी बिक्री हुई। करवाचौथ पर महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं पति की पूजा करेंगी और उसके बाद व्रत संपन्न होता है।

वट सावित्री के साथ ही करवा चौथ का व्रत भी
अल्मोड़ा। पहाड़ में भी अब करवा चौथ व्रत का प्रचलन बढ़ रहा है। अब स्थानीय महिलाएं भी करवा चौथ का व्रत रख रही हैं। पर्वतीय महिलाएं वट सावित्री के व्रत के साथ ही करवा चौथ का व्रत भी करने लगी हैं। एक स्कूल में शिक्षिका कमला पांडे कहती है करवा चौथ के व्रत लेने से मन में जहां शांति मिलती है वहीं पति के प्रति इससे प्रेम भी बढ़ता है। उन्होंने बताया कि वह पिछले 12 सालों से करवा चौथ का व्रत कर रही हैं। गृहणी शोभा मेलकानी का कहना है कि वह 22 सालों से करवा चौथ का व्रत रखती हैं। तनुजा गड़िया ने बताया कि वह पहली बार करवा चौथ का व्रत रखेंगी।

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