
हल्द्वानी। समाज कल्याण विभाग में 2003-04 में जो नियुक्तियां हुई थीं, उनमें धांधली हुई या नहीं यह तो जांच के बाद पता चलेगा लेकिन मजे की बात यह है कि सभी कर्मचारियों को कागजों में पहले एक माह संविदा पर दिखाया गया था। उसके बाद कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति कर दी गई। सभी कर्मचारियों को अपर सचिव और नोडल अधिकारी के हस्ताक्षर के मैनुअल लेटर भी दिए गए थे।
समाज कल्याण की इन नियुक्तियाें को लेकर शासन स्तर पर भी खलबली मची हुई है। सूचना आयोग के निर्देश पर शासन ने इसे गंभीरता से लिया है। 2003-04 में वो कौन अधिकारी था, जिसके कार्यकाल में यह नियुक्तियां हुई थी, इसकी भी जांच की जा रही है। समाज कल्याण विभाग के सूत्रों के अनुसार अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं, उनसे यही साबित हो रहा है कि नियुक्तियां गलत रूप से की गई थीं। एक माह संविदा पर रखकर कर्मचारियों को स्थायी करने की बात से भी धांधली की ‘बू’ आ रही है। मैनुअल लेटर पर अपर सचिव और नोडल अधिकारी के जो हस्ताक्षर हैं वो सही हैं या फर्जी, इसको लेकर भी संशय बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार तब 14 लोगों की स्थायी नियुक्ति की गई थी। यह कर्मचारी वर्तमान में नारी निकेतन, संप्रेक्षण गृह, जिलों के दफ्तरों में बाबू और कई ऑफिसों में चतुुर्थ श्रेणी पद पर कार्यरत हैं।
नियुक्तियाें में धांधली के संदेह के बाद समाज कल्याण विभाग के अफसरों पर फिर अंगुली उठ गई है। इससे पूर्व समाज कल्याण में छात्रवृत्ति, पेंशन, दशमोत्तर छात्रवृत्ति के साथ योजनाओं में फर्जीवाड़ा खुला था। आए दिन समाज कल्याण पर लांछन लगने से विभाग की प्रतिष्ठा पर भी सवाल उठने लगे हैं।
