शॉर्ट टाइम खनन परमिट पर रोक

शिमला। हिमाचल में खनन के शॉर्ट टाइम परमिट पर रोक लग गई है। नई खनन नीति के तहत इस तरह के परमिट राज्य सरकार केवल रेत निकालने के लिए दे रही थी। लेकिन केंद्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रेत निकालने के लिए भी पर्यावरण मंजूरी को जरूरी कर दिया है। यानी पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) क्लीयरेंस के बिना रेत भी नहीं निकाली जा सकेगी। इस फैसले के बाद राज्य सरकार ने परमिट रोक दिए हैं। अब इसकी समीक्षा के बाद ही नई खनन नीति लागू होगी।
हिमाचल सरकार ने रेत-बजरी की कमी को पूरा करने और खनन को ज्यादा पारदर्शी और सरल बनाने के लिए नई खनन नीति 31 जुलाई की कैबिनेट में मंजूर की थी। लेकिन ग्रीन ट्रिब्यूनल का फैसला आने के कारण यह एक हफ्ते बाद ही अटक गई है। उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री कहते हैं कि शॉर्ट टाइम परमिट जारी करने से ऐसे लोगों को भी रेत निकालने का समय मिल जाता, जिनकी अपनी जमीन पर ऐसे भंडार जमा हैं। इससे अवैध खनन रुकना था और सरकार को भी राजस्व मिलना था। इसके लिए सभी उपायुक्तों के साथ भी बैठक के बाद उन्हें परमिट जारी करने की प्रक्रिया बताई गई थी। लेकिन अब ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले की प्रति का इंतजार किया जा रहा है। तब तक परमिट जारी करने पर रोक रहेगी।
इनसेट
नई खनन नीति की मुख्य बातें
1. हिमाचल के नदी-नालों में जेबीसी और पोकलेन जैसी बड़ी मशीनों से खनन बंद होगा। केवल टायर माउंटिड 80 हॉर्स पावर इंजन क्षमता वाली जेसीबी ही यह काम करेगी। यह नियम क्रशर पर भी लगेगा।
2. अब उद्योग विभाग खनन के लिए जरूरी एम-फार्म नहीं छपवाएगा। यह प्रणाली पूरी तरह कंप्यूटरीकृत होगी। बार कोडिंग वाले एम-फार्म शुरू होंगे और एक वाहन के लिए एक ही फार्म होगा।
3. रेत खनन के लिए शार्ट टाइम परमिट जारी होंगे। खनियारा की स्लेट खदानों को नए सिरे से परमिट जारी होंगे। बी-2 कैटेगिरी के ईंट भट्ठों के केस दिल्ली नहीं जाएंगे। इन्हें राज्य सरकार ही निपटाएगी।

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