शुगर फ्री लाल रंग के चावल की मांग बढ़ी

गोहर (मंडी)। बरसात का मौसम खत्म होते ही धान से किसानों के खेत लहलहाने लगे हैं। धान की खेती में जाटू और आननी किस्म का अपना ही महत्व है। जाटू और आननी धान की प्राचीन किस्में हैं। शुगर फ्री और औषधीय गुणों से भरपूर इन किस्मों पर कृषि वैज्ञानिकों ने शोध करने में अभी तक रुचि नहीं दिखाई है। धान की दूसरी किस्मों की तुलना में इस किस्म की कम पैदावार होती है। इसके चलते किसानों ने जाटू व आननी किस्म की खेती करनी छोड़ दी है।
उपमंडल की ज्यूणी घाटी के तुना, करनाला, जाच्छ, शमनोश और धंग्यारा गांवों में किसानों ने अभी भी जाटू और आननी धान की किस्म को कायम रखा है। यहां बड़े पैमाने पर किसान इसकी खेती कर रहे हैं। आननी लाल रंग के चावल होते हैं। इन्हें शुगर फ्री माना जाता है। डायबिटीज के मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते आननी और जाटू चावलों की मांग बढ़ गई है। इसके दाम किसानों को 60 से 80 रुपये तक प्रति किलो के हिसाब से मिल रहे हैं।
किसान इन किस्मों के उत्पादन के समय रासायनिक खादों का प्रयोग नहीं करते हैं। इससे इस धान की महत्व और भी बढ़ जाता है।
क्षेत्र के किसानों प्रेम सिंह ठाकुर, काहन सिंह ठाकुर, रंजीत सिंह, मुरारी लाल राणा, मस्त राम, घनश्याम शर्मा और डॉ. लाल सिंह का कहना है कि उन्होंने आननी और जाटू धान को उगाने की परंपरा को कायम रखा है। इन किसानों ने सरकार से मांग की है कि सरकार इस स्वादिष्ट उत्पाद के संरक्षण के लिए कदम उठाए। मंडी जिला के तुंगल में इसी प्रकार के एक धान की किस्म उगाई जाती है। इसे टबरपाल कहा जाता है। इसका दाना मीठा होता है। कृषि विषय वाद विशेषज्ञ गोहर जीत सिंह ने बताया कि विभाग धान की उक्त किस्मों के संरक्षण के प्रति प्रयासरत है।

Related posts