

प्रबंधक फारुक अहमद ने बताया कि 12 मार्च से स्कूल में छठी से 11वीं तक के छात्रों की परीक्षाएं होनी थीं। दंगाइयों ने इसका इस्तेमाल किया था। इस कारण पुलिस ने स्कूल को सील कर दिया है। उन्होंने कहा कि स्कूल में दोनों समुदायों के बच्चे पढ़ते हैं। इसके सील होने से उनकी पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
उधर, स्कूल के वाइस चेयरमैन सदफ फैसल ने कहा कि स्कूल के बारे में बहुत से लोग भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि 24 फरवरी को स्कूल दोपहर दो बजे बंद हो गया था। इसके बाद 500 से अधिक दंगाइयों ने स्कूल को अड्डा बना लिया था। प्रबंधन पुलिस व प्रशासन से स्कूल खोलने के लिए कह रहा है।
गौरतलब है कि हिंसा के बाद पुलिस को कई वीडियो मिले थे, जिनमें दंगाई इस स्कूल से हमला करते दिख रहे हैं। पुलिस ने छानबीन के लिए मालिक को हिरासत में लेकर स्कूल को सील कर दिया था।
पुलिस पर जाफराबाद इलाके में एकतरफा कार्रवाई का आरोप
ओखला से आप विधायक अमानतुल्लाह खान का आरोप है कि हिंसा के बाद पुलिस की ओर से जारी कार्रवाई से कई सवाल उठ रहे हैैं। हिंसा में अब तक 2193 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें सबसे अधिक एक ही समुदाय के लोग हैं। इससे प्रतीत होता है कि पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है।
हिंसा में दोनों समुदाय का नुकसान हुआ है। इसमें सैकड़ों दंगाई शामिल थेे। पुलिस के पास कुछ इलाकों का सीसीटीवी फुटेज भी है, जिसमें कई लोगों के नाम सामने आए हैं। जाफराबाद के लोगों का आरोप है कि पुलिस घरों से बाहर किसी काम से जा रहे युवकों को भी पूछताछ के नाम पर उठा ले रही हैै। हिरासत में लिए गए लोग दोषी हैं तो उन्हें कोर्ट के सामने क्यों नहीं पेश किया जा रहा है।
