शिवानी के आगे झुका विभाग, बदला शासनादेश

उत्तराखंड में शायद अब शिवानी जैसे प्रतिभावान खिलाड़ी मायूस होकर प्रदेश छोड़ने पर मजबूर नहीं होंगे।

व्यक्तिगत पदक विजेताओं के बराबर मिलेगा पुरस्कार
खेल विभाग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाली टीमों में शामिल खिलाड़ियों को व्यक्तिगत पदक विजेताओं के बराबर पुरस्कार देगा। खेल विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है।

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एशिया कप में भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने बैंकाक में कांस्य पदक जीता था। टीम की सफलता में उत्तराखंड की हॉकी खिलाड़ी शिवानी बिष्ट का अहम योगदान रहा था।

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साल 2013 में खेल विभाग ने शिवानी और उनके कोच पीके महर्षि को सम्मानित किया, लेकिन पुरस्कार राशि काफी कम होने से शिवानी ने चेक खेल सचिव अजय प्रद्योत को वापस कर दिया था।

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खेल विभाग ने शासनादेश का हवाला देते हुए बताया था कि टीम स्पर्धा में सम्मान राशि कुल खिलाड़ियों के हिसाब से बांटी जाती है। इस उपेक्षा से नाराज शिवानी ने उत्तराखंड छोड़कर रेलवे का दामन थाम लिया था।

शिवानी के विरोध का ही नतीजा है कि खेल विभाग को पुरस्कार राशि के शासनादेश में बदलाव को मजबूर होना पड़ा।

आयु वर्ग के अनुसार भी पुरस्कार

युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए खेल विभाग नई-नई योजनाएं और पुरस्कार सामने ला रहा है। अब अलग-अलग आयु वर्ग में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के लिए योजना बनाई जा रही है। जिसका प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है।

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मामलों में अब व्यक्तिगत स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के बराबर ही सम्मान राशि दी जाएगी। किसी भी राष्ट्रीय टीम में उत्तराखंड के एक या दो ही खिलाड़ी होते हैं, ऐसे में सम्मान राशि को कुल खिलाड़ियों के हिसाब से बांटने पर राशि कम हो जाती है। वित्त विभाग से सहमति मिलने के बाद शासनादेश में बदलाव कर दिया जाएगा।

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