

यह किताबें प्रदेश के विभिन्न स्कूलों के पुस्तकालयों में भेजी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्थानों में नए लेखक गृह खोलने की घोषणा भी की। उन्होंने भाषा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में पहले से मौजूद लेख गृहों की स्थिति में सुधार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल सरकार लेखकों को बेहतर रचनात्मक वातावरण उपलब्ध करवाने के लिए हमेशा तत्पर है। पुस्तकों के महत्व पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इनके जरिए अगली पीढ़ी भी अध्ययन के संस्कार हासिल कर सकती है।
उन्होंने संचार के नए युग के साथ चलने का आह्वान करते हुए कहा कि सभी को इंटरनेट के जरिए भी किताबों का अध्ययन करने की जरूरत है। इससे पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दोपहर बाद तीन बजे पुस्तक मेले का रिबन काटकर शुभारंभ किया। शिमला के पोर्टमोर स्कूल की छात्राओं ने सरस्वती वंदना पेश की।
इसके पश्चात विभिन्न वक्ताओं ने आयोजन व पुस्तक मेले पर अपने विचार रखे। मशहूर लेखिका राजी सेठ आयोजन में विशेष अतिथि के तौर पर शामिल हुईं। संपादक-लेखक ओम थानवी के अलावा नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक एमए सिकंदर, हिमाचल कला संस्कृति व भाषा विभाग के निदेशक अरुण शर्मा भी मंच पर मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने शिंदे पर लिखी पुस्तक खरीदी
मुख्यमंत्री ने गेयटी थियेटर में विभिन्न प्रकाशकों के स्टालों का निरीक्षण किया। ‘किसने मेरा भाग्य लिखा’ नाम से सुशील कुमार शिंदे के जीवन पर आधारित पुस्तकों को भी खरीदा।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने जीवन में कई बार राजनीति से रिटायर होने के बारे में सोचा, मगर वह राजनीति में ही रहे और मुख्यमंत्री बनते गए। उन्होंने कहा कि उनका पुस्तकों से खास लगाव रहा है।
