शिक्षक संघ युक्तिकरण के विरोध में

शिक्षक संघ युक्तिकरण के विरोध में
सोलन। प्राथमिक शिक्षक संघ ने बीच शिक्षा सत्र में शिक्षकों की युक्तिकरण (रेशनेलाइजेशन) की प्रक्रिया आरंभ करने पर नाराजगी जाहिर की है। पदाधिकारियों ने सरकार से अनावश्यक युुक्तिकरण न करने की गुजारिश की है। तर्क है कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुकसान होगा और शिक्षक वर्ग भी प्रताड़ित होगा। शिक्षक संघ ने ‘जनरल ट्रांसफर’ के तुरंत बाद बीच सत्र में युक्तिकरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दावा किया है कि शिक्षा सत्र के मध्य तबादलों पर लगाए गए प्रतिबंध के तहत युक्तिकरण की प्रक्रिया अवैध मानी जाए।
प्राथमिक शिक्षा संघ जिला सोलन के अध्यक्ष हेम चंद, वरिष्ठ उप उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह कौशल, महासचिव गुरमेल सिंह चौधरी, कोषाध्यक्ष मनोहर सिंह कौशल, महालेखाकार भुवनेश्वर, सह सचिव प्रदीप कुमार, प्रेस सचिव भाग सिंह, मुख्य सलाहकार अनूप सिंह, सलाहकार चंद्र प्रकाश शर्मा और सुरेश शर्मा, पवन रेखा, महिला विंग की अध्यक्षा रंजना नैय्यर, महासचिव मीना शर्मा, कोषाध्यक्ष रमा शर्मा, रेखा अत्री और शशिबाला ने कहा कि बीच सत्र में युक्तिकरण से छात्रों की पढ़ाई का नुकसान भी होगा। अध्यापकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। कई अध्यापकाें को स्थानांतरित हुए अभी एक अथवा दो ही महीने हुए हैं। संघ ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि विंटर सेशन वाले स्कूलों मेें पूर्व की भांति दिसंबर में ही वार्षिक परीक्षाएं ली जानी चाहिए, लंबे अवकाश के बाद छोटे बच्चों के पढ़ाई पर ध्यान दोबारा केंद्रित होने में परेशानी आ रही है।

पहले युक्तिकरण फिर होते जनरल ट्रांसफर
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार ने 30 जुलाई 2013 के शिक्षक-छात्र अनुपात (रेशो) के अनुसार युक्तिकरण का फैसला लिया है। नियमानुसार बीते वर्ष 30 सितंबर 2012 के हिसाब से युक्तिकरण की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए थी। हाल में हुए जनरल ट्रांसफर के फौरन बाद युक्तिकरण का कोई भी औचित्य नहीं है। अच्छा होता पहले सरकार युक्तिकरण करती और उसके बाद जनरल ट्रांसफर।

तीन अध्यापक हों अनिवार्य
जिला अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान में प्राथमिक शिक्षकों पर बच्चों को पढ़ाने के अलावा, मिड डे मील, साप्ताहिक डाक, पंचायत से लेकर, विधानसभा और लोकसभा तक की वोटर लिस्ट, जनगणना और आधार कार्ड का महत्वपूर्ण कार्य सौंपा गया है। इस दृष्टि से अध्यापकों पर लगातार कार्यों का बोझ बढ़ता जा रहा। ऐसे में एक प्राथमिक स्कूल में कम से कम तीन अध्यापकों का कार्यरत होना आवश्यक है।

1000 स्कूल 1600 अध्यापक
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) में भी शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए प्रत्येक प्राथमिक पाठशाला में तीन अध्यापक अनिवार्य किए गए हैं। सोलन जिला में वर्तमान में करीब एक हजार प्राथमिक पाठशालाओं में 1600 अध्यापक तैनात हैं।

Related posts