
गोपेश्वर। शहीद अजय कुमार की मां अपने बेटे के पार्थिव शरीर से लिपट कर रोती बिलखती कहती रही मेरु अजय अब कख दिखेंण…। शहीद की मां रोते-रोते कई बार बेहोश हुई, जब होश आया तो फिर रोने, बिलखने लगी। पूरे गांव में मातम पसरा है। गांव के क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग और क्या महिला अजय की शहादत पर जहां उनका सिर गर्व से ऊंचा हो गया है, वहीं 23 वर्ष के अजय की मौत से उनकी आंखों के आंसू थम नहीं रहे हैं।
केदारनाथ रेस्क्यू आपरेशन के दौरान शहीद हुए अजय कुमार का पार्थिव शरीर मंगलवार को तीन बजे जैसे ही शहीद के घर पहुंचा, तो घर में पूरा गांव उमड़ गया। वहां खड़े सब लोगों की आंखें नम थी। मां जवान बेटे के मृत शरीर से लिपटकर रोती और रोते-रोते बदहवास हो जाती। कुछ ही देर में फिर होश संभालती, तो फिर बेटे का नाम पुकारते हुए अजय के शरीर से लिपट जाती। वहीं दूसरी ओर, उसके दो बड़े भाई अरुण और अशोक छोटे भाई की अकाल मौत पर रोते-रोते छोटे भाई के मृत शरीर को नम आंखों से निहार रहे थे।
वर्ष 1990 में नंदप्रयाग के थिरपाक गंाव में अजय का जन्म हुआ। जब वह तीन साल का था, तो पिता की मृत्यु हो गई थी। वह संघर्ष करते-करते वर्ष 2009 में जब आईटीबीपी में भर्ती हुआ, तो मां को लगा कि अब घर की जिम्मेदारी अजय संभालेगा, लेकिन किस्मत को कुछ ओर ही मंजूर था। घर वालों ने अजय के लिए लड़की भी पसंद कर ली थी, बस कुछ समय बाद ही सगाई होनी थी। लेकिन केदारनाथ में लोगों की जान बचाते-बचाते वह कालकवलित हो गया। मां और घर वालों की उम्मीदें धरी की धरी रह गई।
