
शिमला। राजधानी शिमला के जंगलों में रात केे अंधेरे में ट्रकों से अवैध डंपिंग करने का सिलसिला जारी है। वन महकमा हालांकि दावा कर रहा है कि अवैध डंपिंग करने वालों पर वह बराबर नजर रख रहा है और रू टीन में गश्त कर धर पकड़ भी की जाती है। लेकिन, वास्तविकता यह है कि अभी भी शहर की सड़कों के किनारे भवन निर्माण से निकलने वाले मलबे के ढेर सड़क के किनारे और जंगलों में फेंके आम देखे जा सकते हैं। टुटीकंडी-लालपानी बाईपास, ढली-संजौली बाईपास, तवी-बालूगंज सड़क किनारे और समरहिल व इसके आसपास के एकांत क्षेत्रों में रात के समय धड़ल्ले से मलबा फेंका जा रहा है।
नगर निगम से वन छिनने के बाद वन शाखा के अफसर भी कार्रवाई करने को लेकर उहापोह में हैं।
एक माह से नगर निगम की वन शाखा ने अवैध डंपिंग को लेकर एक भी चालान नहीं किया है। वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने भी पिछले दिनों जाखू बीट के दौरे के दौरान अफसरों को इस संदर्भ में गंभीरता दिखाने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके वन शाखा के अफसर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अवैध डंपिंग के कारण शहर के जंगलों के पेड़ों को नुकसान होने के साथ ही नए उग रहे पौधे भी मलबे के नीचे दफन हो रहे हैं। कुछ जगह तो डंपिंग होने से पेड़ सूखने भी लगे हैं।
इन स्थानों पर हो रही अवैध डंपिंग
चक्कर, बैरियर के समीप, कुफटाधार, लालपानी बाइपास, संजौली-ढली बाइपास, बाइपास पर भट्टाकुफर व इसके आस पास के अलावा कई ऐसे स्थान है, जहां पर सरेआम सड़क से मलबा नीचे जंगलों में फेंका जा रहा है।
मलबा फेंकने के लिए स्थान चिह्नित : अनीश
नगर निगम के वन मंडलाधिकारी अनीश शर्मा का कहना है कि एमसी ने मलबा फेंकने के लिए 12 डंपिंग साइटें चिह्नित की हैं। इसके अलावा अगर इधर-उधर डंपिंग हो रही है तो कार्रवाई की जाएगी। बाईपास रोड पर अवैध डंपिंग को रोकने की जिम्मेवारी नेशनल हाइवे अथॉॅरिटी की भी है।
