
मंडी। महत्वाकांक्षी महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) कनवर्जेशन के तहत किसान अपनी निजी भूमि पर शहतूत के पौधे लगाकर रेशम कीट पालन कर अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। शहतूत के पौधे लगाने के लिए लाभार्थी को रेशम विभाग के पास आवेदन करने की जरूरत नहीं है। पंचायत में ही पारित सेल्फ के आधार पर लाभार्थी मनरेगा के तहत शहतूत के पौधे लगा सकता है। रेशम कीट पालन के साथ किसान मशरूम का उत्पादन कर भी अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकते हैं।
प्रदेश में रेशम पालन को बढ़ावा देने के लिए मनरेगा कनवर्जेशन के तहत निजी भूमि पर शहतूत के पौधे लगाने का कार्य ग्रामसभा में पारित सेल्फ के आधार पर किया जाएगा। पहले किसान सीधे रेशम विभाग के पास आवेदन करते थे। अब पंचायत के माध्यम से ब्लॉक और जिला परिषद को सेल्फ भेजी जाएंगी। इसके बाद इसे डीआरडीए के पास भेजा जाएगा। पंचायत के माध्यम से मस्ट्रोल जारी होंगे। मनरेगा के तहत किसान अपनी निजी भूमि पर सौ शहतूत के पौधे लगा सकते हैं। इसकी एवज में लाभार्थी को तीन साल तक 6610 रुपये राशि मिलती है। लेकिन अब मनरेगा के तहत निजी भूमि पर तीन सौ तक पौधे किसान लगा सकते हैं। इसके लिए लाभार्थी को तीन साल तक करीब 14000 रुपये मिलेंगे।
रेशम विभाग मंडी के तकनीकी अधिकारी शेर सिंह चौहान ने बताया कि शहतूत के पौधे लगाने का कार्य पंचायत की ओर से पारित सेल्फ के आधार पर होगा। पहले कई किसान विभाग के पास सीधे आवेदन करते थे। लेकिन अब पंचायत के पास ही आवेदन करना होगा। इसका मस्ट्रोल भी पंचायत ही जारी करेगी। रेशम कीट पालन के साथ किसान मशरूम उत्पादन और अन्य कार्य कर सकते हैं। साल में दो बार ही रेशम कीट पालन का सीजन होता है।
