
उत्तरकाशी। अपने प्रयासों से गंगोत्री धाम से सुरक्षित निकलने वाले यात्री सरकारी सिस्टम को जमकर कोस रहे हैं। बेबस यात्री मदद करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं और ग्रामीणों की तारीफ करने से भी नहीं चूक रहे हैं। छह दिनों तक गंगोत्री की ओर फंसे रहने के बाद गिरते पड़ते उत्तरकाशी पहुंचे गुजरात के हरीश भंडारी और नानूभाई ने सरकार और अधिकारियों की नाकामियों को जमकर कोसा। पानीपत हरियाणा के सुरेश शर्मा, हिमांशू शर्मा, खैराती, दिल्ली के पवन, नीमच मध्यप्रदेश के जितेंद्र गर्ग समेत अनेक यात्रियों ने रास्ते में मौके पर फायदा उठाकर व्यापारियों के पानी, चाय, बिस्किट, भोजन, रहने का कमरा आदि के लूट वाले अंदाज में मनमाने दाम वसूलने की शिकायत की। इन शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसा नहीं कि यात्रा मार्ग में सभी लोग मौके का फायदा उठा रहे हैं। उनका कहना है कि स्थानीय ग्रामीणों की मदद से उनको दोबारा जीवन मिला है। हर्षिल, बगोरी, सुक्की, झाला, मनेरी, गणेशपुर में ग्रामीण फंसे हुए यात्रियों को निशुल्क खाना खिला रहे हैं। उत्तरांचल दैवीय आपदा पीड़ित सहायता समिति, भुवनेश्वरी महिला आश्रम, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, सौम्यकाशी रोटरी क्लब आदि संस्थाएं जगह-जगह कैंप लगाकर यात्रियों की सहायता कर रही हैं। व्यापार मंडल उत्तरकाशी बस अड्डा व चिन्यालीसौड़ हवाईपट्टी पर यात्रियों के लिए जलपान एवं मेडिकल की व्यवस्था करवाए हुए हैं।
मदद के आए वनकर्मी
उत्तरकाशी। गंगोत्री घाटी में फंसे यात्रियों की मदद के लिए सरकारी विभाग भी आगे आने लगे हैं। शनिवार को वन विभाग ने गंगोरी में भंडारे लगाने के साथ ही गणेशपुर- नेताला से 300 तीर्थ यात्रियों को सड़क मार्ग तक पहुंचाया। विभाग ने शनिवार को गंगोरी में भंडारा लगाया, जिसमें सैकड़ों यात्रियों ने भोजन किया। वन दारोगा महावीर खरोला ने बताया कि वन कर्मियों ने नेताला-गणेशपुर से पैदल रास्ते 300 से अधिक यात्रियों को सड़क मार्ग तक पहुंचाने में भी मदद की। इस मौके पर डीएफओ बीपी सिंह, एसडीओ वीके वर्मा, एनबी शर्मा, रेंजर नागेंद्र रावत का सहयोग रहा।
