
रुद्रप्रयाग। केदारघाटी जलप्रलय में तबाह हुए व्यावसायिक भवनों का भौतिक और दस्तावेजी सत्यापन के बाद तकनीकी सत्यापन शुरू हो गया है। तकनीकी सत्यापन में देखा जाएगा कि प्रभावित व्यक्ति की भूमि में कितने बड़े भवनों का निर्माण रहा होगा। इसी आधार पर क्षति का आकलन किया जाएगा।
जिला प्रशासन जिले को तीन सेक्टरों में विभाजित कर सत्यापन करवा रहा है। प्रथम चरण में प्रभावित कारोबारियों से भूमि और भवन के दस्तावेज मांगे गए। द्वितीय चरण में लोनिवि और राजस्व विभाग के कर्मियों ने मौके पर जाकर क्षतिग्रस्त परिसंपत्ति का भौतिक सत्यापन कराया। तहसील ऊखीमठ के अंतर्गत गुप्तकाशी से केदारनाथ तक भौतिक और कागजी सत्यापन हो चुका है। अब एसडीएम ऊखीमठ राकेश तिवारी, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता बीएस यादव और लोनिवि के ईई प्रवीण कुमार तकनीकी सत्यापन करेंगे। एसडीएम तिवारी ने बताया कि प्रभावित कारोबारियों ने जमीन संबंधी कागजात दे दिए हैं। इसमें प्रभावित ने जमीन और भवन का ब्यौरा दिया है। इसके अलावा तहसील में खाता-खतौनी उपलब्ध है। समिति यह देखेगी कि प्रभावित व्यक्ति ने जितनी भूमि का रिकार्ड दिया है, उसमें किस माप के भवन का निर्माण हो सकता है। ऐसा तो नहीं कि सरकारी भूमि में अतिक्रमण कर व्यापारिक प्रतिष्ठान का निर्माण किया होगा।
