विशेषज्ञ होता तो, बच जाती इंदु

भरमौर (चंबा)। उपमंडल भरमौर दुर्घटनाओं की दृष्टि से अति संवेदनशील क्षेत्र है। इसके बावजूद सरकार ने यहां स्थित सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक तक तैनात नहीं किया है। स्थानीय लोग कई सालों से विशेषज्ञ की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार ने यहां पर इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाए। इसके चलते यहां के लोगों की जिंदगी रामभरोसे है। सड़क दुर्घटनाओं या गिरने के कारण गंभीर रूप से घायल होने के बाद जिला मुख्यालय रैफर होने वाले कई लोग चंबा-भरमौर मार्ग पर रास्ते में दम तोड़ चुके हैं। बीते शनिवार को चौबिया पंचायत के गांव धनौर की युवती इंदू देवी पुत्री जयकरण अपने मवेशियों को चराने गई। अचानक वह गिर गई और गहरी खाई में जा गिरी। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे नजदीकी सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक न होेने के कारण उसे जिला अस्पताल रैफर कर दिया गया। घाव ज्यादा गहरे होने के कारण उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। अगर भरमौर में विशेषज्ञ चिकित्सक होता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। इंदु ने पिछले वर्ष राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भरमौर से जमा दो की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद उसके माता-पिता उसके हाथ पीले करने के सपने संजोय बैठे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि मवेशियों को चराने जा रही उनकी बेटी का मौत इंतजार कर रही है। उसकी मौत की खबर सुनकर जहां गांव में मातम का माहौल है, वहीं उसके सहपाठी भी काफी दुखी हैं। उपमंडल भरमौर की 29 पंचायतों में करीब 50 हजार आबादी है। इस क्षेत्र से वर्तमान में वन मंत्री हैं। बावजूद इसके आज तक सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात करना तो दूर बीएमओ का पद भी नहीं भरा जा सका है। इसके अलावा विशेषज्ञों की कमी के चलते अस्पताल में कई महंगे उपकरण धूल फांक रहे हैं। सदर पंचायत के प्रधान शिवचरण कपूर ने सरकार से मांग की है कि भरमौर में विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती की जाए। उन्होंने कहा कि यहां पर विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण दुर्घटना के समय घायलों को 62 किलोमीटर दूर स्थित जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है। ऐसे में कई लोग रास्ते में दम तोड़ चुके हैं।

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