
शिमला। आईजीएमसी में किसी दूसरे अस्पताल से आने वाले रेफर मरीजों को वरिष्ठ चिकित्सक देखेंगे। सरकार की ओर से प्रबंधन को यह निर्देश जारी हुए हैैैं। दूसरे अस्पतालों से एमएस या एमडी स्तर के डाक्टर ही मरीजों को आईजीएमसी रेफर करते हैं। इस ध्येय से कि इनका वहां बेहतर उपचार होगा। लेकिन यहां इन मरीजों को इंटर्न और पीजी स्टूडेंट के हवाले कर दिया जाता है। इस स्थिति में एक विशेषज्ञ डाक्टर द्वारा रेफर किए गए मरीजों को अगर इंटर्न या पीजी स्टूडेंट देखें तो मरीज का भगवान ही मालिक?
आईजीएमसी में आधुनिक टेस्ट मशीनें हैं और बेहतरीन कंसलटेंट मौजूद हैं। इसी वजह से प्रदेश भर से विशेषज्ञ डाक्टर गंभीर मरीजों का स्वास्थ्य जांच करने के बाद उनकी हालत को देखते हुए आईजीएमसी रेफर कर देते हैं। लेकिन यहां पहुंचने पर सबसे पहले मरीज को इंटर्न या पीजी स्टूडेंट देखते हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर तक मरीज बिना जुगाड़ तंत्र के सीधा नहीं पहुंच सकता। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि अस्पताल में कोई भी मरीज दाखिल हो, उसे कंसलटेंट रोज एक मर्तबा देखते हैं। सुबह सबसे पहले कंसलटेंट अपनी टीम के साथ वार्डों में जाते हैं और यहां मरीजाें की फाइल देखते हैं। इस आधार पर ही मरीज का अगला ट्रीटमेंट तय करते हैं। सरकार के आदेशों की अनुपालना करवाना प्रबंधन के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि सुबह साढ़े नौ से शाम चार बजे तक तो व्यवस्था की जा सकती है लेकिन शाम और रात के समय कंसलटेंट को आपातकालीन वार्ड में नहीं बैठाया जा सकता। लिहाजा, सरकार के आदेशों की अनुपालना रात को लागू करवाना फिलहाल संभव नजर नहीं आ रहा है। सरकार की घोषणा महज घोषणा तक ही सिमटकर रह जाएगी। उधर, इस बारे में कालेज के प्रिंसिपल डा. एसएस कौशल ने कहा कि सरकार के इस निर्देश को लागू करने के लिए सभी विभागाध्यक्षों को आर्डर निकाले जा रहे हैं।
