विरासतों की अनदेखी: उपेक्षा का शिकार हैं कई विरासत

चंपावत। अतीत में चंद और कत्यूरी राजवंशों की राजधानी रहने के अलावा चंपावत में आजादी के दौर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की विरासत उपेक्षा का शिकार है। जिले में पर्यटन स्थलों के नाम पर स्वामी विवेकानंद के अनुयायियों की ओर से स्थापित अद्वैत आश्रम मायावती, मां पूर्णागिरि धाम, गुरुद्वारा श्रीरीठासाहिब, अंग्रेजों का बसाया एबटमाउंट और पाषाण युद्ध के लिए देवीधुरा की बग्वाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता हासिल है। बावजूद इसके खस्ताहाल सड़कों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थल अपने दिन बहुरने की बाट जोह रहे हैं।
यूं तो चंद राजाओं की राजधानी रहे चंपावत में ही इंसाफ के देवता के रूप में प्रसिद्ध गोलू देवता का मूल मंदिर है, लेकिन चंपावत के मूल मंदिर से ज्यादा पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही गोलू मंदिर की अल्मोड़ा जिले के चितई और नैनीताल जिले की घोड़ाखाल शाखाओं में उमड़ती है। इसके अतिरिक्त खेतीखान की जागोली धर्मशाला में आजादी के दौर में 1934 में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री समेत कई दिग्गज स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने प्रवास किया था, मगर इस स्थल की भी उपेक्षा की गई है। स्थिति यह है कि अधिकांश लोगों को जागोली धर्मशाला के बारे में जानकारी ही नहीं है।

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