
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय सहित प्रदेश भर के कॉलेजों में एबीवीपी ने रूसा के विरोध में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का पुतला जलाया। विवि परिसर में प्रशासन और पुलिस जवानों ने छात्रों को रोकने की तैयारी कर रखी थी, लेकिन एबीवीपी ने इन्हें विरोध प्रदर्शन में व्यस्त रखा। पुस्तकालय के नीचे एबीवीपी के धरने के दौरान पुलिस के 50 के ज्यादा जवान तैनात थे। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने समरहिल चौक पर मुख्यमंत्री का पुतला जला दिया। राजधानी के कॉलेजों में भी मुख्यमंत्री का पुतला जलाया। विद्यार्थी परिषद के राज्य महामंत्री अजय ठाकुर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की स्वीकृति और सरकार के सहयोग के बिना प्रशासन इसे लागू नहीं कर सकता था।
उन्होंने आरोप लगाया कि विवि भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है। यहां प्राध्यापकों से लेकर कर्मचारियों की कमी है। कॉलेजों में प्राध्यापकों की कमी है। शिक्षा का स्तर सुधारने के दावों के पोल सत्र शुरू होते ही खुलने लगी है। कई कॉलेजों में अभी मेजर विषयों की एक भी कक्षा नहीं लगी है। ऐसे में छह महीने में कैसे पाठ्यक्रम पूरा होगा? किताबें अभी छात्रों को नहीं मिल रही हैं। ऐसे में यदि प्रशासन ने बिना किसी तैयारी के रूसा को लागू रखा तो स्तर सुधरने के बजाय गिर भी सकता है। विद्यार्थी परिषद ने चेताया कि यदि शीघ्र इस फैसले को वापस नहीं लिया तो आने वाले समय में पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पुतले का इंतजार करते रहे जवान
एबीवीपी के रैली स्थल पर पुतले का पुलिस जवान इंतजार करते रहे। एबीवीपी ने पुस्तकालय के नीचे रैली की और समरहिल बस अड्डे पर पुतला जलाया। वहां प्रशासन की ओर से एक भी जवान तैनात नहीं था। हालांकि, प्रशासन और पुलिस ने पुतला जलाने से रोकने को पूरी व्यवस्था कर रखी थी।
एनएसयूआई ने की निंदा
विवि परिसर में मुख्यमंत्री का पुतला जलाने के बाद एनएसयूआई ने मुख्यमंत्री के पक्ष में नारेबाजी की। राज्य अध्यक्ष यदुपति ठाकुर की अध्यक्षता में एबीवीपी के खिलाफ और मुख्यमंत्री के पक्ष में नारेबाजी की। राज्य अध्यक्ष ने कहा मुख्यमंत्री का पुतला एबीवीपी ने भाजपा के इशारे मेें जलाया है। यह सरासर गलत है।
