
शिमला। राजधानी के पर्यावरण में आ रहे बदलाव से उत्पन्न समस्याओं को विदेशी मदद से सुधारा जाएगा। महापौर संजय चौहान ने विश्व की शहरी निकायों के लिए कार्य करने वाली संस्था इंटरनेशनल काउंसिल फार लोकल एनवायरमेंट इनिशिएटिव (इक्ली) की ओर से जर्मनी के बोन में चौथी ग्लोबल एडेप्टेशन बोन डिक्लेरेशन चार्टर 2013 कार्यक्रम में पर्यावरण संबंधी समस्याओं को उठाया।
इक्ली ने दुनिया के दस शहरों को पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील माना है। इसमें शिमला शहर को भी शामिल किया गया है। इसके चलते महापौर संजय चौहान ने डर्बन डिक्लेरेशन चार्टर 2011 पर हस्ताक्षर किए हैं। उक्त चार्टर दुनिया के प्रमुख देशों की शहरी निकायों की ओर से पर्यावरण के क्षेत्र में उठाए जाने वाले कदमों के लिए विकल्प प्रदान करने के लिए प्रयासरत है। अभी तक उक्त चार्टर पर दुनिया के 987 महापौर हस्ताक्षर कर चुके हैं। 31 मई से 2 जून तक जर्मनी के शहर बोन में इस चार्टर पर 21 अन्य महापौर ने भी हस्ताक्षर किए हैं। संस्था की ओर से जर्मनी के शहर बोन में चौथी ग्लोबल एडेप्टेशन कार्यक्रम में बोन डिक्लेरेशन चार्टर 2013 पर भी विभिन्न देशों से आए महापौरों ने सहमति जताई है।
महापौर संजय चौहान का कहना है कि बोन डिक्लेरेशन के तहत चार्टर यूएन को भी सौंपा गया है। चार्टर में पहली बार महिलाओं से जुड़े मुद्दे शामिल किए गए हैं। पर्यावरण बचाने के लिए क्योटो संधि सहित कोपनहेगन सम्मेलन के विकल्प के तौर पर उक्त चार्टर कारगर साबित हो सकते हैं। कार्बन डाइआक्साइड सहित ग्रीन हाउस गैस के प्रभाव को कैसे कम करने सहित कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। महापौर संजय चौहान ने बताया कि इस दौरान इंटरनेशनल मेयर काउंसिल की बैठक भी आयोजित हुई। इस दौरान विभिन्न देशों के करीब 35 महापौर शामिल रहे। बैठक में पर्यावरण बचाव के लिए दुनिया में हो रहे प्रयासों की असफलता के लिए शहरी निकायों की ओर से किए जा रहे प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए सहमति जताई गई। उन्होेंने बताया भारत से केरल के कोच्ची शहर के महापौर ने भी इसमें भाग लिया है। वहीं एशिया से दो देशों के महापौर ही कार्यक्रम में शामिल रहे
