
पालमपुर (कांगड़ा)। राज्य सभा सांसद एवं वाणिज्य स्थायी समिति के सदस्य शांता कुमार ने कहा कि देश में विदेशी कंपनियों के एकाधिकार से दवाइयां महंगी हुई हैं। संसद को संसदीय वाणिज्य स्थायी समिति की ओर से दवाई उद्योग में विदेशी निवेश के संबंध में दी गई महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए शांता ने कहा कि इस रिपोर्ट की सिफारिशें भारत के करोड़ों गरीब लोगों को सस्ती दवाई दिला सकती है। पिछले 10 वर्षों में भारत की प्रमुख बड़ी 7 स्वेदशी कंपनियां विदेशी कंपनियों ने खरीदी हैं। रिपोर्ट में कहा है कि हैरानी इस बात की भी है कि विदेशी कंपनियों ने कई गुणा अधिक मूल्य देकर भारतीय कंपनियों को खरीदा है। विदेशी कंपनियां निवेश के बहाने भारत के दवाई उद्योग में एकाधिकार करना चाहती हैं। रिपोर्ट में कहा है कि 1970 से भारत सरकार की ओर से अच्छी नीति अपनाने के कारण भारत का दवाई उद्योग विश्व में अग्रणी बन गया है। भारतीय दवाइयां कम मूल्य की लेकिन गुणवत्ता में बढ़िया होने के कारण अमरीका और यूरोप के देश उन्हें खरीदते हैं। विदेशी कंपनियां इसी बात को ध्यान में रख कर भारत की इन कंपनियों को खरीद कर एकाधिकार प्राप्त करके इस लाभ से वंचित करना चाहती हैं। विदेशी कंपनियों का एकाधिकार बढ़ने से दवाई महंगी होती हैं।
