वित्तीय संकट से बचाएगी निवेश की सही रणनीति

नई दिल्ली।
शेयर बाजार
कोरोना ने दुनियाभर के बाजारों में कोहराम मचा रखा है। उद्योगों और कंपनियों में कामकाज ठप होने से न सिर्फ निवेशकों की पूंजी पर असर पड़ा है, बल्कि कर्मचारियों के सामने वेतन कटौती का संकट भी आ गया है। मौजूदा हालात में आगे किसी वित्तीय परेशानी से बचने के लिए निवेश की रणनीति को बदलना होगा। इसमें तत्काल जरूरत के लिए पूंजी रखने के साथ ही लंबी अवधि के लक्ष्यों को भी ध्यान में रखना होगा। इस दौर में पैसे लगाने और उसे सुरक्षित बनाये रखने की रणनीति बताती प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट –

पैसे की तत्काल जरूरत पूरी करेगा लिक्विड फंड
लॉकडाउन के बाद आय में कमी और वित्तीय संकट बढ़ने की आशंका को देखते हुए लिक्विड फंड में निवेश बेहतर विकल्प हो सकता है। म्यूचुअल फंड के इस सेग्मेंट में पैसों की तत्काल जरूरत पड़ने पर धन निकासी की जा सकती है। कर्ज की ब्याज दरों में कटौती की वजह से बैंकों ने अपने बचत खाते की ब्याज दरें भी घटा दी हैं।

लिहाजा अगर आपको अपनी होम लोन या अन्य किसी कर्ज की ईएमआई चुकाने के लिए रकम सहेजनी है तो उसे चालू खाते या बचत खाते में रखने के बजाय लिक्विड फंड में डालना बेहतर होगा। बचत खाते पर जहां 2 से 3 फीसदी का ब्याज मिलता है, वहीं लिक्विड फंड आपको 6 फीसदी तक ब्याज दिलाते हैं।

  • ध्यान रखें, लिक्विड फंड की लॉक इन अवधि अब 7 दिन हो गई है।
  • अगर इससे कम समय के लिए पैसे लगाने हैं तो ओवरनाइट फंड में निवेश करें, जहां 4.5 फीसदी तक ब्याज मिलता है।
  • एक्सिस और निप्पन जैसे कई लिक्विड फंड 1 घंटे के भीतर 50 हजार रुपये तक निकासी की सुविधा देते हैं।

    निश्चित रिटर्न के एफडी सहित कई विकल्प

    अगर आप निश्चित रिटर्न के विकल्पों में ही पैसे लगाना चाहते हैं तो एफडी, पीपीएफ, एनएससी और पोस्ट ऑफिस मंथली स्कीम जैसे विकल्प हैं। हालांकि, एफडी का विकल्प चुनना है तो जल्दी करें क्योंकि आरबीआई ने रेपो रेट घटा दिया है और अब बैंक एफडी के रेट में भी बड़ी कटौती करेंगे।
    • आप एफडी खरीदने के साथ उसे कम से कम 5 साल के लिए लॉक करा दें, जहां 5-6 फीसदी रिटर्न मिलेगा।
    • इसके अलावा एनबीएफसी के एफडी में भी निवेश कर सकते हैं जहां 8 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
    • वरिष्ठ नागरिक के लिए सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम भी बेहतर विकल्प होगा।

      वर्क फ्रॉम होम: डाटा सुरक्षा बड़ी चुनौती

      लॉकडाउन के बीच कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा तो मिली लेकिन साइबर हमले की चुनौतियां भी बढ़ गईं। ऐसे में कंपनियों के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल डाटा सुरक्षा को लेकर आ रही है… मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेस लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमित गोधेकर का कहना है कि कर्मचारी किसी भी कंपनी का अंतिम उपभोक्ता होता है, डाटा को एक्सेस करता है।

      ऐसे में जब कोई कर्मचारी कंपनी का महत्वपूर्ण और गोपनीय डाटा बाहर कहीं एक्सेस करता है तो उसे सुरक्षा की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि ये चिंता इसलिए भी ज्यादा लग रही है, क्योंकि पिछले 2/3 वर्षों में साइबर हमले ज्यादा बढ़ गए हैं। हैकर्स अब एडवांस्ड पर्सिस्टेंस थ्रेट (एपीटी) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं जो सिस्टम में कई दिनों तक एक्टिवेट रहते हैं और डाटा की चोरी करते हैं। इससे बचने के लिए फिशिंग ईमेल्स से दूर रहना बेहद जरूरी है।

      लंबे लक्ष्य के लिए है इक्विटी म्यूचुअल फंड

      • अगर आपका निवेश लक्ष्य 5 साल या उससे ज्यादा अवधि का हो तो म्यूचुअल फंड के जरिये इक्विटी में पैसा लगाना बेहतर विकल्प होगा। मसलन, बच्चों की पढ़ाई, शादी या रिटायरमेंट प्लान कर रहे हैं तो आपको इस विकल्प का फायदा उठाना चाहिए।
      • माना कि अभी इक्विटी बाजार ढलान पर है लेकिन पिछले 3 दशकों में अगर एसआईपी के जरिये 7 साल के निवेश का रिटर्न देखें तो 12 से 13 फीसदी तक लाभ मिला है। यही कारण है लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड हमेशा से आकर्षक रहा है।

        विशेषज्ञ बोले- कंपनियों और कर्मचारियों दोनों पर बढ़ेगा बोझ

        लॉकडाउन और कोरोना संकट खत्म होने के बाद कंपनियों के सामने वित्तीय पूंजी और कर्मचारियों पर आय में कमी का बोझ बढ़ेगा। उन्हें दैनिक खर्च, बकाया भुगतान और निवेश को सुरक्षित बनाये रखने की तिहरी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में सीधे शेयर बाजार में पैसे लगाने से बचना चाहिए और अपने निवेश के लिए म्यूचुअल फंड के अलग-अलग विकल्पों का इस्तेमाल करना चाहिए। -बलवंत जैन, निवेश  सलाहकार

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