विकास की लौ से कोसों दूर अल्पसंख्यक

चंबा। जिला के मुस्लिम समुदाय में प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के प्रति गहरा रोष है। सरकार और प्रशासन समुदाय की कई समस्याओं को आज तक नहीं सुलझा पाए हैं। जिला में सबसे बड़ी समस्या कब्रिस्तानों की खस्ता हालत की है। समुदाय के विभिन्न संगठन इस संबंध में लंबे समय से मांग करते आ रहे हैं, मगर सरकार और प्रशासन आज तक कुछ नहीं कर पाई है। जामा मस्जिद चंबा के अध्यक्ष दिलदार अली शाह ने बताया कि प्रदेश सरकार जहां आज तक 15 सूत्रीय कार्यक्रम को लागू नहीं कर पाई है, वहीं जिला प्रशासन भी समुदाय की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि जिला के दूरदराज के इलाकों के मुस्लिम परिवार आज भी दयनीय हालत में हैं। उन तक विकास की लौ नहीं पहुंच पाई है। मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के जिला अध्यक्ष लतीफ मोहम्मद ने बताया कि वर्ष 2009 की नोटिफिकेशन के मुताबिक उपायुक्त द्वारा कब्रिस्तान के लिए दो बिघा जमीन मंजूर करने का प्रावधान है। इसको लेकर सोसायटी ने उपायुक्त को ज्ञापन भी दिया था, मगर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई। उन्होंने कहा कि आजकल हज के लिए पासपोर्ट बनाने की व्यवस्था भी जिला स्तर पर नहीं हो पाई है। इसके लिए शिमला जाना पड़ता है। इससे समुदाय के लोगों को काफी दिक्कतें पेश आ रहीं हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पासपोर्ट की प्रक्रिया को उपायुक्त कार्यलय के जरिए दोबारा शुरू किया जाए। यंग मुस्लिम सोसायटी के जिला अध्यक्ष गुलजार खान ने बताया कि प्रदेश स्तर पर अल्पसंख्यक कोटा नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के बेरोजगारों को रोजगार मुहैया करवाने में प्राथमिकता दिए जाने की मांग की है। यंग मुस्लिम एसोसिएशन के कानूनी सलाहकार शारिक अली ने बताया कि कब्रिस्तान की हालत काफी खस्ता बनी हुई है। उन्होंने स्कूलों में उर्दू पढ़ाने की व्यवस्था करने की भी मांग की है। यंग मुस्लिम एसोसिएशन के सह सचिव वसीम मिर्जा ने बताया कि अल्पसंख्यकों के लिए वजीफे का कोई प्रवधान नहीं है। उन्होंने कहा कि समुदाय के लोगों को मुस्लिम वेलफेयर स्कीम तक की जानकारी नहीं है।

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