
रामपुर बुशहर। शहर का वार्ड नंबर पांच मुख्य बाजार से लेकर एनएच केे बीच में होने से यहां छोटी-बड़ी दुकानों का अतिक्रमण भी समस्या का एक कारण बना हुआ है। यहां हर रोज कारोबारियों का अतिक्रमण बढ़ रहा है। वार्ड की निकासी नालियों से पेयजल की सप्लाई लाइन गुजर रही है। इसमें रोजाना कूड़ा-कचरा, घरों, होटलों व ढाबों से निकलने वाला गंदा पानी जल जनित रोगों पीलिया, डायरिया, आंत्रशोथ, टाइफाइड और डाइसेंट्री जैसी गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहा है क्योंकि पेयजल लाइन में थोड़ा सा रिसाव भी लोगों की जान के लिए घातक हो सकता है।
हालांकि पेयजल की लाइन आईपीएच विभाग द्वारा बिछाई गई है, लेकिन नगर परिषद भी जनता की सेहत से खिलवाड़ के लिए बराबरी का जिम्मेवार है। वार्ड की नरसिंह मार्केट में बने शौचालय से निकलने वाली दुर्गंध भी लोगों की परेशानी का सबब बनी हुई है। नरसिंह मार्केट के व्यापारियों और यहां रहने वाले लोगों में कुलदीप ठाकुर, गीता राम, पंकज खत्री, विजय, पवन व दावा साग्मो आदि का कहना है कि शौचालय के पास सुबह तो गंध फैली रहती है। वहीं दिन और रात के समय शौचालय से निकलने वाली दुर्गंध व साथ पड़े कचरे से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। हैरत की बात तो यह है कि शौचालय के बाहर नगर परिषद द्वारा बाकायदा बोर्ड लगाकर कूड़ा फेंकने के समय के बारे में बताया गया है। वार्ड के बुशहर सदन में गंदगी का ढेर लगा देखा जा सकता है। सदन के आसपास रहने वाले लोगों पूर्व प्रधानाचार्य कुशाल ठाकुर, आशु शुक्ला, दिनेश शुक्ला, सविता, श्याम लाल गुप्ता और सुशील का कहना है कि शादी ब्याह के समय यहां अधिक गंदगी फैली रहती है, जबकि यहां की नालियों में पानी जमने के कारण वातावरण दूषित बना रहता है। यहां लोगों के साथ-साथ पास के आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज कर रहे मरीजों और वहां कार्यरत स्टाफ को भारी परेशानी होती है। वहीं कई स्थानों पर सीढ़ियां टूटी-फूटी हालत में हैं। इस वार्ड में महिलाओं के लिए शौचालय का निर्माण करवाना भी आवश्यक है, जबकि कई स्थानों में नालियों में जाली तक नहीं हैं।
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क्या कहते हैं पार्षद
वार्ड नंबर पांच के पार्षद राजेश गुप्ता का कहना है कि आईपीएच की नाकामी के चलते पेयजल सप्लाई निकासी नालियों से भेजी जा रही है। इसके चलते निकासी नालियों पर जाली भी नहीं लगाई जा सकी है। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण करने पर कई बार व्यापारियों को कहा गया, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
