
धर्मशाला। बजट की कमी से धर्मशाला पुलिस का पानी रुक गया है। चौदह लाख से नवनिर्मित वाटर टैंक बीते एक वर्ष से सूखा पड़ा है। पुलिस लाइन धर्मशाला में रहने वाले करीब 200 पुलिस कर्मचारियों को पेयजल समस्या से जूझना पड़ रहा है। वहीं बीस फुट की ऊंचाई पर निर्मित सवा लाख लीटर की क्षमता वाला यह वाटर टैंक वाच टावर में तबदील हो चुका है।
गौरतलब है कि पुलिस विभाग ने पेयजल समस्या से छुटकारा पाने के लिए पुलिस महानिरीक्षक उत्तरी क्षेत्र धर्मशाला कार्यालय के समीप गत वर्ष 25 लाख की लागत से एक वाटर टैंक का काम शुरू करवाया। लेकिन बजट के अभाव में यह प्रोजेक्ट बीच में ही लटक गया। पुलिस विभाग ने इस प्रोजेक्ट का काम आईपीएच विभाग को सौंपा था। इस दौरान विभाग ने प्रोजेक्ट के तहत ढाई लाख रुपए आईपीएच विभाग में जमा करवाए। विभाग ने पहली किस्त मिलते ही काम शुरू कर दिया तथा वाटर टैंक पर चौदह लाख रुपए खर्च कर दिए। लेकिन पुलिस विभाग ने ढाई लाख के बाद आईपीएच को शेष धनराशि उपलब्ध नहीं करवाई। इसके चलते एक वर्ष से काम अधर में लटका हुआ है। उधर, आईपीएच विभाग धर्मशाला के कनिष्ठ अभियंता सुमेश धीमान ने कहा कि पेयजल स्कीम पर अनुमानित 25 लाख रुपए का खर्चा है। लेकिन पुलिस विभाग ने महज ढाई लाख रुपए जमा करवाए। जबकि वाटर टैंक पर अभी तक 14 लाख रुपए व्यय हो चुके हैं। शेष राशि जमा न करवाने के चलते काम बंद पड़ा हुआ है।
पुलिस विभाग के पास बजट नहीं: एएसपी
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कांगड़ा बशेर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने गत वर्ष पुलिस लाइन में पेयजल समस्या को दूर करने के लिए पेयजल स्कीम के निर्देश दिए थे। इसके चलते विभाग ने काम शुरू किया। उन्होंने कहा कि आईपीएच विभाग धनराशि की मांग कर रहा है, लेकिन पुलिस विभाग के पास कोई बजट नहीं है।
