
हल्द्वानी। मुझे टंगे जाने का भय है उस तरह से, जैसे खूंटियों से जाले लग झूलते हैं। ये दो पंक्तियां अपर पुलिस अधीक्षक अमित श्रीवास्तव द्वितीय के उस कविता संग्रह की है जिसके माध्यम से उन्होंने अपने अंतर्मन की व्यथा और समाज के हालातों को बखूबी बयान किया है। हाल में प्रकाशित हुए उनके पहले कविता संग्रह का शीर्षक है ‘बाहर मैं.. मैं अंदर’। अमित श्रीवास्तव आईजी अशोक कुमार के बाद दूसरे पुलिस अधिकारी हैं जिनकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। विभाग के साथ ही आम लोगों में भी इस संग्रह को लेकर काफी चर्चाएं हैं।
नैनीताल के एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव ने दो भागों में ये कविता संग्रह लिखा। ‘मैं अंदर’ भाग में बिना शीर्षक की जो कविताएं हैं वो लेखन के अंतर्मन की व्यथा को बयान करती हैं। जबकि ‘बाहर मैं’ में समाज के तमाम पहलुओं और ज्वलंत मुद्दों को उन्होंने कविताओं के माध्यम से बखूबी समझाया है। जिसमें हर मुद्दे पर अमरीका की दादागिरी, कश्मीर यात्रा के दौरान उनके अनुभव, पुलिस, वकील, डॉक्टर, नेता, जनता, विधायिका, इंजीनियर और तमाम पेशों की असलियत को भी बखूबी बताया है। पुस्तक की सारी कविताएं उनके ब्लॉग ‘तरवताल’ में भी मौजूद हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय के हिंदी रीडर और लेखन शिरीष कुमार मौर्य की कालाढूंगी कांड को लेकर लिखी गई कविता रात में शहर को लेकर भी अमित श्रीवास्तव ने एक कविता इस पुस्तक में लिखी है।
