वर्दियां थैलों में बंद, बच्चे नहीं जा सके स्कूल

शिमला। कृष्णानगर वार्ड में जमींदोज हुए भवनों में रहने वाली नवीं कक्षा की छात्रा रीना और पांचवीं की प्रीति शुक्रवार को स्कूल नहीं जा सके। बच्चों ने बताया कि स्कूल वर्दी तो सामान में बंद पड़ी है, हम स्कूल कैसे जाते। अभिभावकों ने बताया कि असुरक्षित भवनों से सामान निकाल कर अन्य लोगों के घरों पर रखा है। बच्चों की स्कूल वर्दी कहां है, याद नहीं। अभी तो जान बचाने की पड़ी है। यह व्यथा रीना और प्रीति की ही नहीं है। दर्जनों और बच्चे भी इसी मुसीबत का सामना कर रहे हैं।
अंबेदकर भवन में प्रभावितों के रहने की व्यवस्था तो जिला प्रशासन ने कर दी है लेकिन असुरक्षित भवनों से निकाल रहे सामान को कहीं सुरक्षित रूप से रखने के लिए कोई ठिकाना लोगों को नहीं मिल रहा है। वीरवार की रात अंबेदकर भवन में सोने वाले लोगों को टूटे शीशों से आ रही हवा के बीच ठिठुर कर ही गुजारनी पड़ी।
अंबेदकर भवन के बाहर दो टॉयलेट बनाने का काम शुक्रवार को शुरू हो गया है। शुक्रवार को नगर निगम की भवन एवं मार्ग शाखा के कर्मी अस्थायी टॉयलेट बनाने के काम में जुटे रहे। कनिष्ठ अभियंता की देखरेख में करीब एक दर्जन कर्मियों ने सीवरेज लाइन बिछाने और टॉयलेट बनाने का काम किया।
गुरु रविदास सभा के प्रधान चरणदास सहित प्रभावित लोगों काला, विजय कुमार, विनोद, राहुल, पवन, सूरज ने बताया कि अंबेदकर भवन में प्रभावित लोगों के लिए रहने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। प्रशासन को जल्द अन्य स्थानों में भी लोगों को ठहराने का बंदोबस्त करना चाहिए।

बैनर बिछा कर सो रहे बच्चे
लालपानी स्कूल में पढ़ने वाला सूरज, विशाल, प्रवीण और अंकित दोपहर करीब तीन बजे स्कूल से लौटे। चारों बच्चों ने बताया उन्होंने अपनी स्कूल वर्दी वीरवार को ही संभाल कर रख ली थी। स्कूल में अन्य बच्चों को उन्होंने अपना मकान गिरने की बात बताई। दोस्तों के कहा कि हमारे घर चलो लेकिन मम्मी, पापा के साथ ही रहने की उन्होंने बात कही। स्कूल से लौटकर जब आराम करने की बारी आई तो उनको अंबेदकर भवन में एक बैनर बिछा कर ही सोना पड़ा।

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