
सोलन। अब इसे प्रबंधन में कोताही कहें या केंद्र की अनदेखी, मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे सोलन जिला के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के लिए 2013-14 के सालाना वर्क प्लान में करीब 50 फीसदी बजट की कटौती कर दी गई है। इस बार सिविल वर्क यानी भवन मरम्मत और नए भवन के निर्माण के लिए एक भी पैसा अभी तक जारी नहीं हो सका है।
चालू वित्त वर्ष के लिए 32 करोड़ का वार्षिक प्लान केंद्र को मंजूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन महज 16 करोड़ की रकम ही सर्व शिक्षा अभियान और आरएमएसए को जारी हो सकी है। ऐसे में सोलन में बेहतर शिक्षा के दावे हवा हो रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे स्कूलों में और बेहतरी के अधिक प्रयास की जरूरत है। हालांकि अभी भी बजट जारी होने की उम्मीदें अधिकारी लगाए बैठे हैं। यह बजट डाइस की रिपोर्ट के तहत ही केंद्र की तरफ से जारी किया जाता है।
इन मदों में कुछ नहीं
सिविल वर्क डिमांड मिला
एडिशनल क्लासरूम 1.39 करोड़ —
कक्षा की मेजर रिपेयर 50 लाख —
क्लासरूम मायनर रिपेयार 25 लाख —
बाउंडरी वाल 81.63 लाख —
बिजली 24.30 लाख —
प्राइमरी, अप्पर प्राइमरी में 90 हजार बच्चे
सोलन जिला में प्राइमरी और अप्पर प्राइमरी के करीब-करीब 800 से अधिक स्कूल हैं। इनमें प्राइमरी में साठ हजार बच्चे और अप्पर प्राइमरी में करीब तीस हजार बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। हालांकि सर्वशिक्षा अभियान के तहत स्कूलों के आधारभूत ढांचे बेहतर किए जा रहे हैं, लेकिन अभी भी स्कूलों की व्यवस्थाओं में कई खामियां हैं।
तो इसलिए कटा बजट
इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नए भवनों के निर्माण की अब जरूरत नहीं है, यह तर्क देकर केंद्र ने कटौती कर दी है। वहीं खर्चे और यूटिलिटी सर्टिफिकेट न जमा होने पर भी बजट कम किया गया है। बजट फिर से भी जारी हो सकता है। अधिकांश स्कूलों में बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की कोशिश की जा रही है।
