
शिमला। हिमाचल में शरणार्थियों के अवैध तरीके से वन भूमि पर निर्माण के मामले में ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कड़ा संज्ञान लिया है। ट्रिब्यूनल ने मैकलोडगंज और रिवालसर में वन भूमि पर किसी भी तरह के निर्माण करने पर रोक लगा दी है। ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दोनों जगह तिब्बतियों की ओर से चट्टानों पर बनाई गई कलाकृतियों पर भी रोक लगा दी है। कांगड़ा और मंडी जिलों के डीसी और एसपी को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं कि इन कलाकृतियों को मिटाकर चट्टान को उसके प्राकृतिक रूप में पुन: ढाला जाए। ट्रिब्यूनल ने मंडलायुक्त मंडी और कांगड़ा को भी ये आदेश दिए हैं कि उनके समक्ष अवैध निर्माण से जुड़े जितने भी मामले तिब्बतियों से संबंधित लंबित हैं, उनका निपटारा 5 सप्ताह के भीतर किया जाए।
ग्रीन ट्रिब्यूनल हिमाचल के दौरे पर हैं और इसके अध्यक्ष न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार ने मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई की। उन्होंने राज्य सरकार के संबंधित अफसर को आदेश दिए हैं कि वे शपथ पत्र के माध्यम से ट्रिब्यूनल को यह बताएं कि उन्होंने अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की? रिवालसर झील को वास्तविक स्थिति में लौटाने के लिए क्या कारगर कदम उठाए गए? कितने अवैध निर्माणों को गिराया गया और कितनों को बेदखल किया गया? ट्रिब्यूनल ने मुख्य अरण्यपाल वन विभाग से भी इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है, क्योंकि मामला मुख्य तौर पर वन विभाग से जुड़ा है।
पवन कुमार ने जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर कर तिब्बतियों की ओर से किए जार रहे अवैध निर्माण से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को उजागर किया था। आरोप था कि मैकलोडगंज और रिवालसर सहित पूरे प्रदेश में कई स्थानों पर तिब्बतियों ने अवैध निर्माण किया है। कई स्थानों पर तिब्बतियों के नाम पर फर्जी तौर से इंतकाल चढ़ा दिए हैं।
