वनों को आग से बचाने की कवायद शुरू

नाहन (सिरमौर) चीड़ की बारीक नुकीली ज्वलनशील पत्तियों को उठाने के लिए एक निजी कंपनी के बाद अब जिला के वन महकमे ने इस मामले में अपने तरीके से काम करने का मन मनाया है। महकमा इसके लिए दिल्ली स्थित एक निजी कंपनी से संपर्क साध रहा है। कंपनी जिला के चीड़ बहुल क्षेत्रों में जाकर वहां नुकीली पत्तियों को ग्रामीणों से खरीदेगा। वन विभाग का अनुमान है कि यदि ऐसा होता है तो वर्ष 2011-12 के मुकाबले इस वर्ष चीड़ के पेड़ों को आग से 45 फीसदी तक बचाया जा सकेगा।
अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उक्त निजी कंपनी ग्रामीणों को चीड़ की नुकीली पत्तियों की खरीद फरोख्त के बाद किस भाव से शुल्क अदा करेगी। इतना तय है कि इस वर्ष आगामी एक अप्रैल से लेकर 15 जुलाई तक रहने वाले फायर सीजन में आग से वनों को होने वाले नुकसान में भारी गिरावट की संभावना है। इससे पूर्व वनों में आग लगने का सबसे खतरनाक जरिया इन्हीं सूखी पत्तियों को माना गया है। जिला में आग लगने की घटनाओं में सबसे ज्यादा संवेदनशील राजगढ़, शिलाई तथा नाहन मंडल के क्षेत्रों को माना जाता है। इन क्षेत्रों में हर वर्ष जंगलों में भयंकर आग लगती है। इससे जंगलों के अलावा प्राकृतिक संपदा तथा जंगली जानवरों का भारी नुकसान होता है।

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