
करसोग (मंडी)। करसोग क्षेत्र की दुर्गम पंचायतों की करीब 20 हजार आबादी के लिए निर्माणाधीन करोड़ों रुपये की पेयजल योजना लोगों के आपसी झगड़ों से अधर में लटक गई है। क्षेत्र की गत्तू, बगड़ा और धरेड़ पंचायतों के 45 गांवों के लिए बगड़ा थाच उठाऊ पेयजल योजना का काम नौ सालों से अधर में लटका पड़ा है। इस योजना के पूरे होेने से सराड, खादरा, नागडी नाला, थुहा, करगाणू, रेस्टा थाच, नढान, घिस्टा और थीन सहित करीब 45 से अधिक गांवों के 20 हजार लोगों को पेयजल सुविधा मिलनी है।
उठाऊ पेयजल योजना के लिए नागड़ा नाला के प्राकृतिक जलस्रोत से पानी उठाया जाना है। लेकिन स्थानीय लोगों की जिद के चलते आईपीएच विभाग इस योजना को समय पर पूरा नहीं कर पा रहा है। वहीं स्थानीय निवासी भूप सिंह, दयानंद, सुंदरलाल, धत्ता राम, गोपाल, गोगलू राम, श्याम लाल वर्मा और चांद रतन का कहना है कि ग्रामीण मुख्य जलस्रोत को लेकर चिंतित हैं। इस परियोजना के लिए यहां से पानी ले जाने पर लोगों को खेतीबाड़ी के लिए पानी नहीं मिलेगा। ग्रामीणों का कहना है कि पहले छोटे नालों का चैनेलाईजेशन करके पानी का भंडारण किया जाए। इसके बाद ही इस उठाऊ पेयजल योजना को कार्र्यान्वित किया जाए।
लोगों ने मांग की है कि पेयजल के साथ लोगों के लिए सिंचाई योजना के तहत खेतों के लिए पानी मुहैया करवाया जाए। वहीं क्षेत्र की अन्य पेयजल योजनाओं में करसोग बाजार के लिए एक करोड़ 75 लाख, सुगली भंथल के लिए 1 करोड़ 5 लाख और डररोट-भनेरा 70 लाख की पेयजल योजनाएं भी अधर में लटकी पड़ी हैं। आईपीएच के सहायक अभियंता बीएल वर्मा ने कहा कि बगड़ा थाच परियोजना के लिए लोगों का सहयोग जरूरी है। इनके सहयोग के बिना इस योजना को पूरा करना संभव नहीं।
जल्द पूरा होगा योजनाओं का काम
क्षेत्र में जो भी पेयजल योजनाएं अधर में लटकी हुई है। उन्हें पूरा किया जाएगा। नदी नालाें का चैनेलाइजेशन कर जल भंडारण को प्राथमिकता देंगे। अधूरी पड़ी पेयजल योजनाओं को पूरा करने के लिए आईपीएच विभाग से एस्टिमेट मांगे हैं। वहीं अधूरी पड़ी योजनाओं को पूरा करने के लिए युद्ध स्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं।
विधायक एवं मुख्य संसदीय सचिव मनसा राम
