लोकसभा तक पहुंचने का ‘जुगाड़’ बने रामदेव

लोकसभा चुनाव में भाजपा का सिंबल चाहने वाले कई दावेदार इन दिनों हरिद्वार पतंजलि योगपीठ की परिक्रमा कर रहे हैं।

योगगुरु बाबा रामदेव की भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से नजदीकियां दावेदारों को पतंजलि योगपीठ खींचकर ला रही हैं। हरिद्वार सीट से ही टिकट चाहने वालों की लंबी लिस्ट है।

राजनीति से किनारा नहीं
यह सभी बाबा रामदेव के जरिए लोकसभा तक पहुंचने का जुगाड़ भिड़ाने में लगे हैं। स्वामी रामदेव ने भले ही स्वयं राजनीति में आने का एक बार देखा गया ख्वाब छोड़ दिया हो, किंतु राजनीति से वे किनारा नहीं कर पाए।

मोदी को पीएम प्रोजेक्ट कराने में रामदेव ने पूरी ताकत झोंक दी। भाजपा ने जिस तरह से नरेंद्र मोदी को शक्तिसंपन्न बनाकर पेश किया है, उससे माना जा रहा है कि टिकट बंटवारे में मोदी का बोलबाला रहेगा।

मोदी और रामदेव के रिश्ते काफी घनिष्ठ
मोदी और रामदेव के रिश्ते काफी घनिष्ठ हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि कुछ सीटों पर बाबा रामदेव की पसंद का ध्यान भी रखा जा सकता है। मोदी की सरकार आयी तो बाबा की मंशा अपने सांसदों के माध्यम से शक्ति बनाए रखने की है।

फलस्वरूप टिकटार्थियों ने बाबा के चक्कर लगाने अभी से शुरू कर दिये। हरिद्वार लोकसभा सीट से दावेदारी करने वाले भाजपा के दो विधायक रामदेव के करीब हैं। दोनों ही मानकर चल रहे हैं कि टिकट के लिए बाबा उनकी सिफारिश करेंगे।

संगठन से जुड़े दो नेता भी रामदेव के भरोसे हरिद्वार सीट से चुनाव लड़ने का ख्वाब संजोये बैठे हैं। हरिद्वार सीट के अलावा यूपी और हरियाणा की कई सीटों के दावेदार पतंजलि योगपीठ में समय दे रहे हैं।

संतों के इर्द-गिर्द घूमती रही आधी राजनीति
हरिद्वार की आधी राजनीति संतों के आसपास घूमती रही है। अतीत में अनेक संतों ने चुनाव लड़े हैं और जीते हैं।

हरिद्वार के एक संत तो भारत सरकार के गृह मंत्रालय तक जा पहुंचे। वस्तुत: चुनाव में टिकट पाने का माध्यम साधु-संत बन गए हैं।

बाबा रामदेव जैसे संत ने तो एक बार देश का प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब ही देख लिया था। वर्तमान में सत्ताधीशों ने जिस प्रकार मठाधीशों के सामने माथा टेकना शुरू कर दिया है, उसे देखते हुए सत्ताधीशों के और अधिक नजदीक आने के आसार उत्पन्न हो गए हैं।

राजनीति में संतों का दखल पहले से रहा है। रामचंद्र परमहंस, नृत्यगोपाल दास, धीरेंद्र ब्रह्मचारी, आचार्य धर्मेंद्र, स्वामी सत्यमित्रानंद आदि संतों का राजनीति सदैव मान करती आयी है। ब्रह्मचारी ब्रह्मस्वरूप जैसे संत राजनैतिक दल के संगठनात्मक पदाधिकारी भी बने हुए हैं।

आचार्य जगदीश मुनि दो बार रहे विधायक
चिन्मयानंद केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रह चुके हैं और आचार्य जगदीश मुनि दो बार हरिद्वार के विधायक रहे हैं। सतपाल महाराज की तूती राजनीति में बोलती आयी है।

इसी प्रकार देश के अनेक भागों में साधु-संतों ने राजनीति में प्रवेश किया और कालांतर में राजनीति धर्माचार्यों के चक्कर लगाने लगी।

अनेक साधु-संत ऐसे हैं जो सीधे तो राजनीति में भाग नहीं लेते, किंतु राजनीति उनके विचार लेने के लिये खुद उन तक चलकर आती है। ऐसे साधुओं में से अधिकांश के डेरे तीर्थों पर ही हैं।

जैसे-जैसे आम चुनाव नजदीक आता जाएगा, साधु-संतों की महत्ता भी बढ़ती जाएगी। हरिद्वार में तो ऐसा लगता है मानो आधी राजनीति कनखल और हरिद्वार के संत बाहुल्य क्षेत्रों में ही मंडरा रही हो।

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