
अपने गांव रालेगण सिद्धि को आदर्श गांव बनाने के बाद देश में ऐसी ज्योति जलाने निकले 74 वर्षीय किसन बाबू राव हजारे अर्थात अन्ना हजारे ने देश में सूचना का अधिकार लागू करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अन्ना हजारे ने महाराष्ट में 2 भ्रष्ट मंत्रियों तथा अनेक अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करने के बाद देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करवाने के लिए सरकार पर कठोर दंड प्रावधानों वाला जन लोकपाल लाने के लिए दबाव डालने के उद्देश्य से ‘सिविल सोसायटी’ का गठन किया।
इसमें उन्होंने न्यायाधीश संतोष हेगड़े, मैगसेसे पुरस्कार विजेता अरविंद केजरीवाल, प्रख्यात वकील शांतिभूषण और उनके सुपुत्र प्रशांत भूषण व आई.पी.एस. अधिकारी किरण बेदी जैसे लोगों को शामिल किया।
सरकार द्वारा कठोर लोकपाल न लाने के विरुद्ध अन्ना हजारे अब तक 4 अनशन कर चुके हैं और इन दिनों वह 10 दिसम्बर से फिर रालेगण सिद्धि में अनशन पर बैठे हुए हैं तथा अपना आंदोलन अराजनीतिक रखने पर अडिग हैं।
इसके विपरीत 2011 में अन्ना हजारे के साथ जुड़कर चर्चित हुए अरविंद केजरीवाल ने उनसे अलग होकर गत वर्ष अपनी राजनीतिक पार्टी ‘आम आदमी पार्टी’ (आप) बनाकर चुनाव घोषित होते ही सबसे पहले दिल्ली में विधानसभा चुनाव लड़ कर कांग्रेस व भाजपा को पराजित किया है।
चुनावों के बाद केजरीवाल स्वयं 13 दिसम्बर को रालेगण सिद्धि जाकर अन्ना से मिलना चाहते थे पर अचानक बीमार होने के कारण उन्होंने अनशन पर बैठने के लिए गोपाल राय को वहां भेज दिया।
अपने भाषण के दौरान जब पूर्व जनरल वी.के. सिंह ने कहा कि कुछ लोगों ने अन्ना के आंदोलन का फायदा उठाते हुए राजनीति की और फिर उन्हें अकेला छोड़ दिया तो यह सुनते ही गोपाल राय भड़क उठे और उन्होंने खड़े होकर जनरल सिंह के भाषण के बीच में ही उनकी टोका-टाकी शुरू कर दी जिस पर अन्ना हजारे नाराज हो गए।
अन्ना बोले, ‘‘आपसे किसी ने अनशन में आने के लिए नहीं कहा था पर आप अनशन पर बैठे। अब लोग आपसे भाषण के बीच में न बोलने के लिए कह रहे हैं लेकिन आप लगातार टोका-टाकी कर रहे हैं।
‘‘आपको शोर ही मचाना है तो आप यहां मत बैठिए, आप गांव छोड़कर जा सकते हैं।’’अन्ना की डांट के बाद भी राय वहां जमे रहे और अंतत: रालेगण सिद्धि के सरपंच के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें गांव से बाहर भेजा जा सका।
इस बीच 13 दिसम्बर को 42 वर्ष से अटका हुआ संशोधित लोकपाल बिल राज्यसभा में पेश हो गया पर इस पर चर्चा शुरू नहीं हो पाई लेकिन अनशन पर बैठे अन्ना हजारे ने इस संशोधित बिल पर हामी भर दी और कहा कि लोकपाल जैसे ही कानून बनेगा वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
परंतु केजरीवाल ने इसे ‘जोकपाल’ करार देते हुए खारिज कर दिया और कहा कि ‘‘ इस सरकारी लोकपाल विधेयक से भ्रष्टाचार दूर नहीं होगा और किसी राजनेता तो क्या किसी चूहे तक को जेल नहीं भेजा जा सकता।’’ इसके उत्तर में अन्ना ने कहा कि ‘‘इसके पारित होने के बाद अगर ‘आप’ इसमें खामियां पाती है तो उसे उनके विरुद्ध आंदोलन करना चाहिए।’’
इस बीच भाजपा, जद (यू) व तेदेपा भी संशोधित लोकपाल के पक्ष में आ गईं परंतु श्रम मंत्री ओला के निधन के चलते संसद स्थगित हो गई और अब मंगलवार को इसके पारित होने की संभावना है।
अरविंद केजरीवाल के प्रमुख साथी गोपाल द्वारा अन्ना के अनशन में टोका-टाकी और फिर सरकार द्वारा पेश संशोधित व अन्ना द्वारा स्वीकृत लोकपाल विधेयक के विरुद्ध बयान देकर केजरीवाल ने अपनी छवि को आघात ही पहुंचाया है।
अन्ना हजारे जिस रणनीति के साथ लोकपाल विधेयक, ‘राइट टू रिजैक्ट’ व अन्य चुनाव सुधारों के लिए काम कर रहे हैं, उस पर किसी को कोई एतराज नहीं, अत: केजरीवाल व उनके साथियों को इन मामलों पर अन्ना से टकराव से हर हालत में बचना चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं करेंगे तो उनका और उनकी पार्टी को नुक्सान ही होगा।
