लावारिस मरीज को दिनभर भटकाया

धर्मशाला। क्षेत्रीय अस्पताल में उपचाराधीन चल रहे एक लावारिस मरीज को बेहतर इलाज के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज में भेजा गए, लेकिन टीएमसी में उसको दाखिल नहीं किया गया। यह कहकर वापस भेज दिया गया कि इसका जो इलाज यहां होना है, धर्मशाला में भी हो जाएगा। टांडा के डाक्टर मंगलवार को मरीज को परिसर में भटकाते रहे और शाम को वापस धर्मशाला भेज दिया। हालांकि, टीएमसी में 10 के करीब सर्जन हैं और धर्मशाला अस्पताल में एक ही सर्जन है।
बेहतर सुविधाएं देने का दम भरने वाले टीएमसी में असहाय मरीज काफी परेशान हुआ। यह लावारिस मरीज कुछ दिन पहले धर्मशाला अस्पताल के बाहर पड़ा था। इसके दोनों पैर कुत्तों ने नोच दिए थे। जख्म काफी गहरे हो गए थे, लेकिन किसी समाजसेवी को मरीज पर दया नहीं आई थी। फिर अस्पताल प्रबंधन ने ही मरीज को दाखिल कर लिया था। अस्पताल प्रबंधन के सूत्रों की मानें तो मरीज मानसिक तौर पर भी ठीक नहीं है। मरीज के जख्मों में कीड़े पड़ चुके हैं। मरीज कई बार इलाज के दौरान अस्पताल से बाहर भाग जाता है। मरीज गैंगसीन बीमारी से ग्रस्त है। जख्मों से तंग मरीज कभी केरोसिन छिड़ककर शरीर पर आग लगा रहा है तो कभी पीड़ा से कराह रहा है। इसको मानसिक रोग विशेषज्ञ से भी इलाज करवाना होगा। इसलिए मरीज को टांडा रेफर किया गया, लेकिन टांडा में मरीज को दाखिल ही नहीं किया गया।
धर्मशाला अस्पताल के एमएस डा. बीएम गुप्ता ने बताया कि फिर से लावारिस मरीज को अस्पताल में उपचार के लिए दाखिल किया है। इस मरीज को दो सप्ताह पहले मैकलोडगंज से एक पर्यटक अस्पताल परिसर में छोड़ कर गया था। बीच में मरीज अस्पताल से भाग गया था। तीन दिन पहले मरीज अस्पताल परिसर में आया और अस्पताल प्रशासन ने सोमवार शाम मरीज को दाखिल किया। इसके बाद मंगलवार को इलाज के लिए टांडा रेफर किया गया था। टांडा मेडिकल कॉलेज के एमएस डा. दिनेश सूद ने बताया कि मरीज के घावाें में पट्टी होनी है। इस कारण मरीज को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। मरीज की हालत सामान्य थी।

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