लद्दाख में 3.6 रिक्टर तीव्रता से महसूस किये गए भूकंप के झटके

लद्दाख में 3.6 रिक्टर तीव्रता से महसूस किये गए भूकंप के झटके

जम्मू
लद्दाख में भूकंप के झटके महसूस किये गए हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 3.6 मापी गई है। 

इससे पहले महाराष्ट्र के पुणे जिले के पुरंदर के पास शाम 7.28 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक रिक्टर स्केल पर तीव्रता 2.6 मापी गई।

आपको बता दें कि भूगर्भविज्ञानी अपने अध्ययनों के माध्यम से समय-समय पर जमीन के नीचे की हलचल नापते रहे हैं और अलर्ट भी जारी करते रहे हैं। कुछ दिन पहले पता चला था कि चंडीगढ़ में सुखना लेक के सामने स्थित शिवालिक की पहाड़ी भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील है। वैज्ञानिकों को इस पहाड़ी में फाल्ट मिला है। इस फाल्ट के कारण कभी भी भूकंप आ सकता है। 

वैज्ञानिकों ने इस फाल्ट को हिमालयन फ्रंटल फाल्ट का नाम दिया है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा के भी कई हिस्सों में फाल्ट लाइन मिली हैं। वैज्ञानिकों ने इसकी पूरी रिपोर्ट भारत सरकार के भू विज्ञान मंत्रालय को भेज दी है।

पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के भूगर्भ विज्ञान विभाग के प्रो. महेश ठाकुर ने यह शोध किया है। कई साल तक चले शोध के जरिए उन्होंने कई महत्वपूर्ण व चौंकाने वाले तथ्य प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने रिमोर्ट सेंसिंग डेटा के जरिए विश्लेषण किया और उसके बाद परिणाम जारी किए। चंडीगढ़ की सुखना लेक के सामने ही शिवालिक की पहाड़ी है, जो बहुत नजदीक है। इसी पहाड़ी के कोने में फाल्ट मिला है।

यानी यहां कभी न कभी भूकंप आया है, जिसके कारण पृथ्वी की आंतरिक संरचना प्रभावित हुई है। इसी संरचना प्रभाव के कारण भविष्य में कभी न कभी भूकंप आने की संभावना जागृत होती है। हालांकि 400 साल पहले पिंजौर, बद्दी क्षेत्र में भूकंप का केंद्र रहा था। उसका कनेक्शन भी इस फाल्ट लाइन से जोड़कर वैज्ञानिक देख रहे हैं।

जमीन से तीन से चार मीटर नीचे ही मिली फाल्ट लाइन
इसी तरह पंजाब के रोपड़ और पठानकोट के पास व्यास नदी में फाल्ट लाइन पाई गई है। वहीं, पंचकूला के गांव खेतपुराली में भी बड़ी फाल्ट लाइन पाई गई है। इससे यह पता चल रहा है कि यहां कभी न कभी भूकंप का केंद्र रहा था। खास बात यह है कि यह फाल्ट लाइन जमीन से महज तीन से चार मीटर नीचे ही है।

वहीं, कालका के पास स्थित थापली में भी फाल्ट लाइन मिली है। पंचकूला में मिली सभी फाल्ट लाइन का आपसी मेल वैज्ञानिक देख रहे हैं। इसकी गोपनीय रिपोर्ट केंद्र सरकार के भू विज्ञान मंत्रालय को भेजी गई है। शोध का कार्य अभी चल रहा है। बताया जा रहा है कि कई चौंकाने वाले तथ्य अभी सामने आएंगे।

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