लघु उद्योगों को चाहिए अलग नीति

मैहतपुर (ऊना)। सूबे का लघु उद्योग अलग उद्योग नीति चाहता है। एक ऐसी नीति जिसके तहत लघु उद्योग को पेश आने वाले समस्याओं का हल आसानी से हो सके। लंबे अर्से से यह मांग उठती रही है, लेकिन अभी तक इस दिशा में किसी भी सरकार ने कोई पुख्ता कदम नहीं उठाए हैं।
यही वजह है कि सूबे के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में लघु उद्योग तो स्थापित हुए हैं, लेकिन उनको अनेक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इस कारण वह कुछ ही समय के बाद उद्योग बीमार होते जा रहे हैं। लोकसभा के इस चुनावी मौसम में लघु उद्योगों को चलाने वाले ज्यादातर उद्यमियों की निगाहें केंद्र में बनने वाली नई सरकार पर टिकी हैं। अकेले ऊना जिला के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की बात करें, तो यहां पर अब भी तकरीबन 40 फीसदी से ज्यादा लघु उद्योग अलग उद्योग नीति तय न होने के चलते या तो बीमार हैं अथवा बंद हो चुके हैं। नए स्थापित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों में भी कमोवेश ऐसी ही परिस्थितियां पैदा हो रही हैं। इस दिशा में जल्द सकारात्मक कदम न उठाने की जरूरत है।
उद्यमियों की मानें तो टैक्स निर्धारण में पंजाब एवं हिमाचल में भारी असमानता, नए यूनिट की खरीदारी में पुरानी लायबिलिटी में भारी अंतर, उद्योग नीति में नए-नए फार्मूले, लघु उद्योगों को व्यावसायिक गतिविधियों में शुमार न करना, कच्चे माल की उपलब्धता सरलता से न होना, उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार का उपलब्ध न होना आदि अनेक अन्य दिक्कतों के चलते लघु उद्योग मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। इनका कहना है कि मदर यूनिट स्थापित होने से लघु उद्योगों की काफी हद तक समस्याएं स्वत: ही हल हो जाएंगी।

क्या कहते हैं उद्योगपति
उद्योग संघ के मौजूदा अध्यक्ष बलतेज इंद्र सिंह, पूर्व अध्यक्ष बलराम चंदेल, पूर्व अध्यक्ष पंडित पीसी शर्मा, उद्यमी रामपाल शर्मा, पूर्णलाल शर्मा, रंजीत ऐरी, विजय लॉ, भीषम जोशी समेत कई अन्य उद्योगों का कहना है कि प्रदेश में ज्यादातर लघु उद्योग चल रहे हैं। लिहाजा इनके लिए अलग से नीति तय होनी चाहिए।

बोले उद्योग मंत्री
उद्योगमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जब से कांग्रेस सरकार आई है, लघु उद्योगों को प्रोत्साहित किया है। उनकी दिक्कतों को सुना और समझा जा रहा है। यही कारण है कि दूसरे राज्य से कई उद्योग घराने प्रदेश में पूंजी निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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