
शिमला। हिमाचल में आबकारी एवं कराधान विभाग ने लग्जरी टैक्स और उसका दायरा बढ़ा दिया है। इसमें होटलों के अलावा अब रेस्तरां, हाउस बोट, बार, टेंट, मैरिज पैलेस, लॉन और गार्डन को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही विभाग ने टैक्स लगाने के फार्मूले को भी बदल दिया है। पहले विभाग की ओर से तय रेटों पर ही होटलियरों को लग्जरी टैक्स अदा करना होता था, लेकिन अब पर्यटन विभाग की ओर से तय और वास्तव मेें वसूली गई राशि में से जो भी अधिक होगा, उस पर दस फीसदी टैक्स लिया जाएगा।
राज्य सरकार ने राज्य टैक्स ऑन लग्जरी (होटल और आवास गृह) विलास-वस्तुएं कर संशोधन अधिनियम 2013 को लागू किया है। इससे हिमाचल के होटलों से आबकारी एवं कराधान विभाग को पहले के मुकाबले ज्यादा राजस्व मिल सकेगा। सरकार ने 1979 के अधिनियम में संशोधन किया है। एक बार विधानसभा में पास होने के बाद अब सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को राज्यपाल ने मुहर लगा दी है। इसी दौरान पिछले दिनों में हिमाचल प्रदेश होटलियर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी मांगें रखी थीं। इनकी मांगों के बाद मुख्यमंत्री ने विभाग को दोबारा से इसका संशोधन विधेयक लाने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने इस एक्ट में फिलहाल पिछले संशोधन के अनुसार बदलाव कर दिया है।
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एक्ट में संशोधन कर दिया गया है। होटलियरों की मांग के बाद अगले विधानसभा सत्र में दोबारा से संशोधन विधेयक लाया जाना है। इसमें होटलियरों को राहत मिल सकती है।
-श्रीकांत बाल्दी, प्रधान सचिव आबकारी एवं कराधान विभाग
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पिछड़ी पंचायतों में होटल पर दस साल की छूट
प्रदेश सरकार ने जनजातीय क्षेत्र, हार्ड एरिया और पिछड़ी पंचायतों में होटल बनाने पर दस साल तक टैक्स छूट देने का फैसला लिया है। सरकार ने इसमेें संशोधन के निर्देश जारी कर दिए हैं। सरकार के आदेशों के अनुसार होटल बनने के बाद दस सालों तक यह छूट मान्य होगी। यह फैसला ग्रामीण और हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किय गया है।
