
मंडी। प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने वर्ष 2030 के लिए विजन डाक्यूमेंट तैयार कर लिया है। इसमें अधिक से अधिक किसान परिवारों को रेशम कीट पालन से जोड़ने, शहतूत के पौधे रोपने और आधारभूत ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है। रेशम विभाग ने विजन डाक्यूमेंट तैयार कर हर वर्ष के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है।
रेशम कीट पालन प्रदेश के किसानों के लिए अच्छी आमदनी का बेहतर जरिया बन सकता है। जंगली जानवरों, बंदरों और मौसम की मार झेल रहे किसान रेशम उत्पादन कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकते हैं। गत दिनों शिमला में हुई रेशम विभाग के अधिकारियों की बैठक में विजन डाक्यूमेंट पर चर्चा कर सभी जिलों को लक्ष्य के मुताबिक कार्ययोजना दी गई। विजन डाक्यूमेंट में वर्ष 2030 तक प्रदेश में करीब 21 हजार से अधिक किसान परिवारों को रेशम कीट पालन से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक प्रदेश में लगभग नौ हजार किसान परिवार ही कोकून का उत्पादन कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। रेशम कीट पालन के लिए शहतूत की प्लांटेशन जरूरी है। इसलिए प्रति वर्ष पौधरोपण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा वर्ष 2030 तक प्रदेश में प्राइवेट सेक्टर में कीट पालन गृह की संख्या 600 तक करने का लक्ष्य दिया गया। किसान नर्सरियों को बढ़ा कर करीब 244 किया जाएगा।
जिला रेशम विभाग के तकनीकी अधिकारी शेर सिंह चौहान ने बताया कि प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2030 के लिए विजन डाक्यूमेंट तैयार किया गया है। जिसके मुताबिक हर वर्ष के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। चालू वित्तीय वर्ष में मंडी डिवीजन में एक लाख 25 हजार शहतूत के पौधे लगाए जाएंगे। इसी प्रकार अगले वर्षों के लिए भी प्लांटेशन का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
