रेल मंत्री के पांच चौंकाने वाले खुलासे

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बुलेट स्पीड से पढ़े गए बजट में रेल मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने कई ऐसे तथ्यों का खुलासा किया, जिससे विपक्ष की त्योरियां चढ़ गईं। लेकिन इन तथ्यों ने चौंकाया भी।

ये तथ्य ऐसे थे, जिन्होंने रेलवे की माली हालत से पर्दा उठा दिया।

इनमें पिछली सरकारों के कारनामों का भी खुलासा था। आप भी पढ़िए रेलमंत्री सदानंद गौड़ा के रेल बजट की चौंकाने वाली बातें-

एक रुपए की कमाई पर 94 पैसे खर्च

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रेलवे एक रुपए कमाने के लिए 94 पैसे खर्च करती है। इस प्रकार रेलवे के पास मात्र 6 पैसे ही अधिशेष बचते हैं। इसे रेलवे की बचत या लाभ भी कह सकते हैं, जिसका इस्तेमाल नई परियोजनाओं या विकास संबंधी अन्य कार्यों के लिए किया जाता है।

रेल मंत्री सदानंद गौड़ा के मुताबिक, ये अधिशेष भी लगातार घट रहा है। रेल किरायों की समीक्षा न करने के कारण रेलेवे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है।

रेल बजट भाषण में रेल मंत्री ने बताया कि तमाम खर्चो के बाद 2007-08 में रेलवे के पास 11,754 करोड़ रुपए शेष थे। लेकिन मौजूदा वित्त वर्ष में मात्र 602 करोड़ रुपए ही बच पाएंगे।

676 परियोजनाएं में 317 ही हुईं पूरी

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रेलमंत्री ने बताया कि पिछले 30 साल में 1,57,883 करोड़ रुपए की 676 परियोजनाएं स्वीकृत की गईं। लेकिन पूरी हुईं सिर्फ 317 ही हो पाईं, बाकी 359 अभी भी लटकी हुई हैं।

रेलमंत्री के मुताबिक, पिछली सरकारों का जोर परियोजनाओं को पास करने के पर ही अधिक रहा। उन्हें पूरा करने पर ध्यान नहीं दिया गया। रेलवे की रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 1,82,000 करोड़ रुपए की जरूरत।

30 साल में पूरी हुई एक लाइन परियोजना

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पिछले 10 साल में 60,000 करोड़ की 99 नई लाइन परियोजनाओं को मंजूर किया गया। हालांकि पूरी मात्र एक लाइन ही हो पाईं। नई लाइनों की 4 परियोजनाएं 30 साल से भी ज्यादा समय से लटकी हई हैं।

रेलमंत्री सदानंद गौड़ा के मुताबिक, नई लाइनों की चार परियोजनाएं 30 से भी अ‌धिक सालों से किसी ना किसी कारण से लटकी हुई हैं।

रेल बजट भाषण में उन्होंने कहा कि जितनी ज्यादा नई परियोजनाओं की घोषणा की जाएगी, हमारे उतनी ही कम संसाधन खर्च कर पाएंग और उन्हें पूरा भी नहीं किया जा सकेगा।

दोहरीकरण के लिए मात्र 18,400 करोड़

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पिछले 10 साल में 5050 किमी रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए मात्र 18,400 करोड़ रुपये खर्च किए गए। जबकि 3738 किमी नई लाइनों को बिछाने के लिए 41,000 करोड़ का हुआ खर्च।

रेल मंत्री ने बताया कि नई लाइनों के बिछाने और दोहरीकरण सरकार के प्राथमिकता में होना चहिए था, लेकिन इस पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया

रेलवे के पास 125 करोड़ से ज्यादा ग्राहक

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रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे एक ऐसा व्यापार, जिसके पास 125 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं, जिसकी 100 फीसदी बिक्री अग्रिम भुगतान पर होती हो। बावजूद इसके वह घाटे में है।

हालांकि इस रेल बजट में रेलवे की सेहत सुधारने पर जोर है। इसका अंदाजा इसी से लग सकता है कि इस बजट में न तो एक भी नई परियोजना का ऐलान हुआ है और न ही किसी वर्ग को छूट या रियायत की रबड़ी ही दी गई है।

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