

ये तथ्य ऐसे थे, जिन्होंने रेलवे की माली हालत से पर्दा उठा दिया।
इनमें पिछली सरकारों के कारनामों का भी खुलासा था। आप भी पढ़िए रेलमंत्री सदानंद गौड़ा के रेल बजट की चौंकाने वाली बातें-
एक रुपए की कमाई पर 94 पैसे खर्च

रेल मंत्री सदानंद गौड़ा के मुताबिक, ये अधिशेष भी लगातार घट रहा है। रेल किरायों की समीक्षा न करने के कारण रेलेवे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है।
रेल बजट भाषण में रेल मंत्री ने बताया कि तमाम खर्चो के बाद 2007-08 में रेलवे के पास 11,754 करोड़ रुपए शेष थे। लेकिन मौजूदा वित्त वर्ष में मात्र 602 करोड़ रुपए ही बच पाएंगे।
676 परियोजनाएं में 317 ही हुईं पूरी

रेलमंत्री के मुताबिक, पिछली सरकारों का जोर परियोजनाओं को पास करने के पर ही अधिक रहा। उन्हें पूरा करने पर ध्यान नहीं दिया गया। रेलवे की रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 1,82,000 करोड़ रुपए की जरूरत।
30 साल में पूरी हुई एक लाइन परियोजना

रेलमंत्री सदानंद गौड़ा के मुताबिक, नई लाइनों की चार परियोजनाएं 30 से भी अधिक सालों से किसी ना किसी कारण से लटकी हुई हैं।
रेल बजट भाषण में उन्होंने कहा कि जितनी ज्यादा नई परियोजनाओं की घोषणा की जाएगी, हमारे उतनी ही कम संसाधन खर्च कर पाएंग और उन्हें पूरा भी नहीं किया जा सकेगा।
दोहरीकरण के लिए मात्र 18,400 करोड़

रेल मंत्री ने बताया कि नई लाइनों के बिछाने और दोहरीकरण सरकार के प्राथमिकता में होना चहिए था, लेकिन इस पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया
रेलवे के पास 125 करोड़ से ज्यादा ग्राहक

हालांकि इस रेल बजट में रेलवे की सेहत सुधारने पर जोर है। इसका अंदाजा इसी से लग सकता है कि इस बजट में न तो एक भी नई परियोजना का ऐलान हुआ है और न ही किसी वर्ग को छूट या रियायत की रबड़ी ही दी गई है।
