
रुद्रप्रयाग। हर बार दैवी आपदाआें का दंश झेलने वाले रुद्रप्रयाग जनपद को पिछड़ा क्षेत्र घोषित करने की मांग उठने लगी है। स्थानीय लोगाें का कहना है कि दैवी आपदा के कारण जिले में हर बार भारी जन-धन की हानि होती है, जिस कारण यहां का विकास थम गया है। जिले के विकास के लिए इसे पिछड़ा क्षेत्र घोषित किया जाना जरूरी है, जिससे क्षेत्र में स्वास्थ्य, संचार, शिक्षा, यातायात समेत अन्य सुविधाआें का विकास तेजी से हो सके। वर्ष 1997 में रुद्रप्रयाग जनपद गठन के बाद से लगातार दैवी आपदा से जूझता रहा है और अब केदारनाथ त्रासदी ने पूरे जिले को शोक में डूबा दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता गजपाल सिंह रावत का कहना है कि केदारनाथ त्रासदी से जन-धन हानि के साथ ही रोजगार और अन्य संसाधन समाप्त हो गए हैं। लोगाें के सम्मुख आजीविका का संकट पैदा हो गया है। उन्हाेंने कारोबारियों का बैंक ऋण माफ कर जिले को पिछड़ा क्षेत्र घोषित करने की मांग की है।
