राहत कार्यों में नहीं है तेजी : निशंक

श्रीनगर। पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने आपदा प्रभावित क्षेत्र शक्ति विहार, भक्तियाना और आईटीआई का दौरा कर प्रभावितों के हाल-चाल जाने। उन्होंने प्रभावितों को आश्वासन दिया कि हालात जल्द सुधारने के हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन की सुस्ती पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यहां राहत कार्य तेजी से नहीं हो पा रहे हैं। आठ दिन बाद राजमार्ग खुल जाना चाहिए था और प्रभावित क्षेत्र में सड़क बन जानी चाहिए थी। इस मौके पर प्रभावितों ने बांध परियोजना की निर्माणदायी कंपनी जीवीके पर भी आरोप लगाया कि जीवीके का डंपिंग यार्ड ही घरों में घुसे भारी मात्रा में मलबे का सबब बना है। पूर्व सीएम ने इसकी जांच का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि परियोजना का विश्लेषण करने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने परियोजनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कार्ययोजना बनाने की जरूरत बताई।

तो बच सकती थीं हजारों जानें: डा. निशंक
श्रीनगर। केदारनाथ में अगर पहले दिन से ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो जाता तो कई और जानें बचाई जा सकती थीं। इसके लिए नौकरशाह दोषी हैं जो सीएम को सही सूचनाएं नहीं दे पाए। पूर्व सीएम डा. निशंक ने स्थानीय निवासियों पर लग रहे लूटपाट के आरोपों का पुरजोर खंडन किया। साथ ही उन्होंने एक महायोजना तैयार कर प्रदेश के पुनर्निर्माण की भी बात कही।
प्रेस वार्ता में पूर्व सीएम डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि नौकरशाहों ने सीएम को अंधेरे में रखा। इसके चलते बचाव कार्य समय से शुरू नहीं हो पाए। उन्होंने दावा किया कि केदारनाथ के जंगलों में अब भी हजारों यात्री फंसे हुए हैं। डा. निशंक ने कहा कि इस त्रासदी में केवल यात्रियों को ही पूछा जा रहा है, जबकि सब कुछ गंवा चुके गांववालों की अब तक कोई सुध नहीं ली। गुप्तकाशी, गौरीकुंड जैसे सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में लोग एफडी तुड़वाकर यात्रियों के रहने-खाने की निशुल्क व्यवस्था कर रहे हैं। टूर ऑपरेटर यात्रियों से पैसे तक नहीं ले रहे। ऐसे में उत्तराखंड वासियों पर लूटपाट के आरोप लगाना सही नहीं है। निशंक ने नंदा देवी राजजात की तैयारियों को लेकर भी संशय जताया। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि अगर तैयारियां पूरी नहीं हैं तो पंडितों या अन्य जानकारों के साथ बैठक करके इसे पीछे सरकाया जाना बेहतर होगा। उन्होंने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल के केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में जूते लेकर जाने पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

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