
बागेश्वर। कपकोट के पिंडर घाटी क्षेत्र में आपदा का असर अभी तक खत्म नहीं हो सका है। टूटी सड़कों की हालत नहीं सुधरी है, पुलों का नवनिर्माण नहीं हो सका है। पैदल रास्ते बदहाल हैं। आपदा को गुजरे 110 दिन हो चुके हैं। घाटी के लोग पटरी से उतरी दिनचर्या को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
16 और 17 जून की बारिश से पिंडर, सुंदरढुंगा सहित तमाम नदी-नालों के पुल बह जाने के कारण किलपारा, सोराग, तीख, ओखलिया, भराकांडे, कुंवारी,बदियाकोट, समडर,बोराचक, झारकोट, बाछम, खाती आदि गांव टापू बन गए और हेलीकाप्टरों के माध्यम से राशन भेजना पड़ा। एक मात्र बाछम का पुल बचा था। अब लोनिवि ने पिंडर में दो ट्रालियां भी लगा दी हैं। एक रास्ता गढ़वाल की तरफ खुला है। इसके बावजूद लोगों को 15 किमी से लेकर 35 किमी तक पैदल चलना पड़ रहा है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता सीएस नेगी ने बताया कि छोटे पैदल पुलाें के टेंडर हो चुके हैं। बड़े पुलों के टेंडर शीघ्र कराए जाएंगे। लोनिवि अधिकारियों के मुताबिक पोथिंग के अलावा अन्य सभी सड़कें छोटे वाहनों के लिए खोल दी गई हैं। लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सड़कों की हालत काफी खराब है। इलाके के सभी गांवों में पैदल रास्ते ध्वस्त होने के कारण आवागमन की समस्या है। पन बिजली परियोजनाआें की अब मरम्मत हो रही है। पेयजल योजनाओं को काम चलाऊ बनाने के प्रयास हो रहे हैं। स्थानीय लोेग आधी अधूरी सुविधाओं के बीच जीवन यापन करने को विवश हैं।
खच्चरों से हो रहा राशन का ढुलान
बागेश्वर। पिंडर घाटी में आपदा के बाद राशन की कमी के चलते लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वहां हेलीकाप्टरों से राशन भेजना पड़ा। तहसीलदार मदन सिंह बिरोड़िया ने बताया कि वहां सितंबर तक का राशन भेज दिया गया है। सम से 20 किमी दूर तीख के गोदाम तक खच्चरों से ढुलान हो रहा है।
