राष्ट्रीय बांस मिशन काश्तकारों को करेगा प्रोत्साहित

अल्मोड़ा। राष्ट्रीय बांस मिशन जिले में बांस उत्पादन को बढ़ावा देगा। उद्यान विभाग के माध्यम से चालू वित्तीय वर्ष में जिले में 39 हेक्टेयर क्षेत्र में बांस रोपण का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत बांस रोपण में आने वाले खर्च में से आधी धनराशि सब्सिडी के तौर पर काश्तकारों को मिलेगी।
पर्वतीय क्षेत्र में जंगली जानवरों के फसल को नुकसान पहुंचाने से काश्तकार खेती से विमुख हो रहे हैं। पहाड़ में काश्तकारों के पास काफी बंजर भूमि है। ऐसे में काश्तकार बांस की खेती कर आर्थिक आय अर्जित कर सकते हैं। घेरबाड़ में बांस के पौधे रोपित कर जंगली जानवरों से फसल को पहुंचाए जाने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकता है।
राष्ट्रीय बांस मिशन की योजना के तहत काश्तकार को 16 हजार रुपये की लागत से एक हेक्टेयर क्षेत्र में 400 बांस के पौधे लगाने होंगे। इसमें से आधी धनराशि आठ हजार रुपये काश्तकार को वहन करनी होगी, जबकि बंबू मिशन काश्तकार को आठ हजार रुपये की सब्सिडी देगा। जिला उद्यान अधिकारी दयालु राम ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में योजना के तहत सरकारी उद्यानों में 13 हेक्टेयर और निजी क्षेत्र में 26 हेक्टयर क्षेत्र में बांस रोपण का लक्ष्य है। जिले केे घाटी वाले क्षेत्र सोमेश्वर, सेराघाट, चौखुटिया, ताड़ीखेत, मावड़ा, मासी बांस उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं। क्षेत्र के लिए लाठी बांस और हिल बांस (झाड़ीनुमा) प्रजाति मुफीद हैं।

बांस बनेगा आय का जरिया
अल्मोड़ा। बांस से डलिया, सूप, टोकरी, चटाई के अलावा शो-पीस आदि बनाए जाते हैं। वर्तमान में व्यवसायिक रूप से बांस का उत्पादन नहीं होने, पर्याप्त कच्चामाल नहीं मिलने से काश्तकार बांस से बनाए जाने वाली वस्तुओं का व्यवसायिक उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। मिशन की इस योजना से क्षेत्र में बांस उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बांस की पत्तियां चारे के रूप में भी उपयोग में लाई जाती हैं। इसके अलावा यह भूस्खलन रोकने में भी सहायक है।

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