राजा’ बघाट की लीज डीड देने से इनकार

शिमला। राज्य सूचना आयोग ने लगभग 70 साल पहले की ‘राजा’ बघाट की एक लीज डीड की जानकारी दिलाने से इनकार किया है। आयोग ने अपने निर्णय में सोलन निवासी कुशल कुमार जेठी की अपील को खारिज कर कहा कि आरटीआई एक्ट के तहत हर सूचना को नहीं दिया जा सकता है। यह आदेश राज्य सूचना आयुक्त केडी बातिश की कोर्ट ने जारी किए हैं। यह फैसला गैर जरूरी और अनर्गल सूचनाओं को एकत्र करने में जुटे जनसूचना अधिकारियों के लिए राहतप्रद है।
प्रार्थी ने मुख्य सचिव कार्यालय से बघाट रियायत के ‘राजा’ और दुर्गा क्लब सोलन के बीच आजादी से पहले की लीज डीड पर ब्योरा मांगा। मुख्य सचिव कार्यालय ने यह दरख्वास्त तहसीलदार सोलन को भेजी। उन्होंने प्रार्थी से लीज डीड नंबर और इसकी तिथि मांगी। प्रार्थी ने जनसूचना अधिकारी यानी तहसीलदार को कहा कि सारा रिकार्ड उनके कार्यालय में मौजूद है। तहसीलदार कविता ठाकुर ने प्रार्थी को कहा कि राजस्व रिकार्ड के अनुसार सोलन के गांव सेर में दुर्गा क्लब के नाम से लीज डीड की कोई एंट्री नहीं है। इसे वर्ष 1969 से लेकर अब तक देख लिया गया है। 1969 से पहले का राजस्व रिकार्ड उपायुक्त सोलन के कार्यालय में है। इससे असंतोष जताकर प्रार्थी ने उपायुक्त सोलन के समक्ष प्रथम अपील की। डीसी ने तहसीलदार को आदेश दिए कि यह रिकार्ड देखा जाए। इसकी सूचना प्रार्थी को दी जाए। तहसीलदार ने उपायुक्त कार्यालय और लोक निर्माण कार्यालय के अधिशासी अभियंता के पास मौजूद रिकार्ड की छानबीन की। दुर्गा क्लब सोलन के अध्यक्ष और लोक निर्माण विभाग के बी एंड आर सोलन मंडल के अधिशासी अभियंता को भी पत्र लिखा। राजस्व रिकार्ड रूम के प्रभारी ने सूचित किया कि रिकार्ड में इसकी कोई सूचना नहीं है। इसे आवेदक को भी जारी किया गया। इसके बाद प्रार्थी ने आयोग के समक्ष द्वितीय अपील की। इसे खारिज कर दिया गया।
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विशेष प्रक्रिया के तहत विशेष सूचना पर लागू एक्ट
आयोग ने कहा कि आरटीआई एक्ट के तहत हर (ईच एंड एवरी) सूचना नहीं मांगी जा सकती है। यह एक निश्चित (सरटेन) सूचना है, जो एक्ट के तहत मांगी जा सकती है। वांछित सूचना आरटीआई एक्ट के दायरे से बाहर है। यह एक्ट टाइम बाउंड अवधि में विशेष प्रक्रिया के तहत विशेष सूचना पर लागू है। उसी सूचना को पहुंच में लाया जा सकता है, जो पब्लिक अथॉरिटी के नियंत्रण में है।
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सूचना के अस्तित्व से निश्चित होना चाहिए प्रार्थी
आयोग के अनुसार एक प्रार्थी जब कोई दरख्वास्त देता है, तो वह सूचना के अस्तित्व और पब्लिक अथॉरिटी के पास इसकी मौजूदगी के बारे में निश्चित होना चाहिए। एक पब्लिक अथॉरिटी से विभिन्न स्रोतों से सूचना एकत्र करने और इसे इसके बाद प्रार्थी को देने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। यहां भी पब्लिक अथॉरिटी ने सूचना को देने के लिए हर प्रयास किए। इसे विभिन्न स्रोतों से प्राप्त करने की कोशिश की गई, जो इसका कर्तव्य नहीं था।

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