रहने लायक नहीं रहा खारबगड़ गांव

बागेश्वर। कपकोट के खारबगड़ गांव में नदी और स्थानीय नाले के कारण भूकटाव और जमीन दरकने के कारण पूरा गांव असुरक्षित हो गया है। जिससे यहां के लोग भयभीत हैं। खेती योग्य भूमि लगभग तबाह हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि विस्थापन के अलावा अब कोई विकल्प नहीं है।
रीठाबगड़ से लगभग डेढ़ किमी दूर रेवती की संकरी घाटी में स्थित खारबगड़ गांव में पिछले कई सालों से यह संकट बना है। पिछले साल भी बारिश के कारण भूकटाव और भूस्खलन हुआ। बारिश के साथ इस बार रेवती से फिर भूकटाव होने लगा। पीछे की पहाड़ी से भी भूस्खलन होता रहता है। गांव में बजियाणी नाले ने भूमि काट दी है। कई स्थानों पर चीड़ के पेड़ गिरे पड़े हैं। खतरे की आहट को भांपते हुए कई परिवारों ने पलायन शुरू कर दिया है। खारबगड़ निवासी पूर्व सैनिक केशर सिंह बरती ने बताया कि गांव में 38 परिवार हैं। लगातार बाढ़ और भूस्खलन के कारण भूमि तबाह हो गई है। लोगों के पास अब इतनी कम भूमि है कि खेती से दो जून की रोटी का इंतजाम संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले कई सालों से यह समस्या बनी है। पूरा गांव खतरे की चपेट में है। कई परिवारों ने अन्यत्र शरण ले रखी है। बारिश का मौसम गुजरने के बाद लोग लौट भी आए तो अगले साल फिर उसी संकट से रू-ब-रू होना पडे़गा। प्रशासन ने निरीक्षण के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी है। ग्रामीणाें का कहना है कि उन्हें तराई में खेती योग्य भूमि देकर वहां बसा दिया जाना चाहिए।

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