

शुद्धि, नेकी का आध्यात्मिक माह रमजान
इस माह मुस्लिम समुदाय के लोग रोजे रखेंगे। रमजान के माह में रोजे रखने का मतलब महज भूखा-प्यासा रहना नहीं है। बल्कि यह इंसान की आत्मा में सद्भावनाओं व अच्छाइयों को जगाने की प्रक्रिया है।
इसी वजह से इसे आत्मिक शुद्धि और नेकी का आध्यात्मिक महीना भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस महीने अल्लाह की रहमत के दरवाजे खुल जाते हैं। लिहाजा, इस महीने मुस्लिम समुदाय के लोग अल सुबह से देर रात तक सिर्फ अपने दीन यानी अल्लाह की इबादत में मसरूफ रहते हैं।
रमजान मुबारक

एक माह रोजे रखते हैं मुस्लिम समुदाय के लोग
इतना ही नहीं, दूसरों के बारे में बुरा सोचकर, पीठ पीछे बुराई करके अथवा तकलीफ पहुंचाने वाली बात कहकर भी रोजे नहीं रखे जा सकते। लिहाजा यह एक कठिन तप की तरह है।
रमजान की सबसे बड़ी नेअमत कुरआन है। दिलो-दिमाग में एक चिराग की तरह प्रकाशित यह पाक ग्रंथ लाखों मुस्लिमों को मुंह जुबानी याद है। कुरआन की पहली ईशवाणी रमजान के महीने में ही पैगंबर हजरत मोहम्मद (सल्ल) पर नाजिल (उतरी) हुई है। इस लिहाज से रमज़ान और कुरआन का गहरा संबंध है।
