
शिमला। धर्मशाला स्थित योल छावनी के सैनिटरी इंस्पेक्टर दीपक कुमार को फर्जी डिप्लोमा के आधार पर नौकरी पाने का दोषी करार देते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी शिमला ने तीन साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। वर्ष 2010 में सीबीआई की शिमला शाखा ने दीपक कुमार के खिलाफ धारा 420, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद सीबीआई के अधिकारियों ने मामले की जांच की।
सीबीआई के अनुसार जांच में पाया गया कि दीपक कुमार ने फर्जी डिप्लोमा सर्टिफिकेट के आधार पर सैनिटरी इंस्पेक्टर की नौकरी हासिल की थी। सीबीआई के अनुसार फर्जी सर्टिफिकेट पटना के इंडियन इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ एजूकेशन एंड रिसर्च ब्यूरो द्वारा जारी होना बताया गया था। जांच के दौरान यह सर्टिफिकेट फर्जी पाया गया। कोर्ट में मुकदमे के दौरान जांच टीम ने 12 गवाहों को पेश किया गया। कोर्ट ने आरोपी को उक्त सभी धाराओं के तहत दोषी पाया और शुक्रवार को आरोपी के खिलाफ सजा सुनाई।
सीबीआई के एसपी आर उपासक ने बताया कि सेनिटरी इंस्पेक्टर दीपक कुमार को धारा 420 और 468 के तहत तीन-तीन साल के साधारण कारावास की सजा और पांच-पांच हजार की जुर्माना लगाया है। इसके अलावा धारा 471 के तहत दो वर्ष के साधारण कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
