योजनाएं बनाने में अव्वल, लागू करने में फिसड्डी

शिमला(वीरेन्द्र खागटा)एचआरटीसी यात्रियों के हित में योजनाएं बनाने में तो अव्वल है, लेकिन योजनाओं को लागू करने में फिसड्डी है। एचआरटीसी ने शहर के उपनगरों और साथ लगते क्षेत्रों के लिए 49 बसों का संचालन आईएसबीटी से करने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके अभी तक बसें आईएसबीटी नहीं पहुंच पा रहीं।
एचआरटीसी द्वारा उपनगरों के लिए आईएसबीटी से सीधी बस सेवा की घोषणा के बाद शहर की जनता ने राहत की सांस ली थी लेकिन बसों की आवाजाही शुरू न होने के कारण लोगों की परेशानी खत्म नहीं हुई है। सीधी बस सेवा के अभाव में बाहरी क्षेत्रों से शिमला पहुंचने वाले लोगों को अपने घरों तक पहुंचने के लिए दो से तीन बार बसें बदलनी पड़ रही हैं। ओल्ड बस स्टैंड और आईएसबीटी के बीच बसों की कनेक्टिवटी कम होने के कारण लोगों को भारी ओवरलोडिंग झेलनी पड़ रही है। इतना ही नहीं देर रात आईएसबीटी पहुंचने वाले लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए टैक्सी वालों के हाथों लूटना पड़ रहा है। बसों की आवाजाही आईएसबीटी से शुरू न होने के मामले को लेकर एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक देवासेन नेगी ने बताया कि लोकल यूनिट के तीनों सेक्टरों से चयनित रूट आईएसबीटी से चलाए जा रहे हैं। चालक परिचालकों को बसें आईएसबीटी से ही चलाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि यदि बसें आईएसबीटी नहीं जा रहीं तो बसों की आवाजाही आईएसबीटी से सुनिश्चित की जाएगी।

इन रूटों पर चलाई जानी थीं बसें
संजौली, छोटा शिमला, ढली, मल्याणा, कसुम्पटी, भट्ठाकुफर, मशोबरा, न्यू शिमला, बालूगंज, टुटू, समरहिल, शोघी, विकास नगर, मैहली सहित शहर के साथ लगते ग्रामीण क्षेत्र।

बसों के आईएसबीटी न जाने का यह भी है कारण
शहर के उपनगरों और साथ लगते क्षेत्रों को टूटीकंडी आईएसबीटी से जोड़ने के लिए एचआरटीसी प्रबंधन द्वारा निर्देश तो जारी कर दिए गए हैं लेकिन आईएसबीटी में इन बसों की एंट्री नहीं हो रही। एंट्री की व्यवस्था न होने के कारण बसों को आईएसबीटी ले जाने को लेकर चालक परिचालक मनमर्जी कर रहे हैं।

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