ये मिड डे मील है या स्लो प्वाइजन!

काशीपुर। मिड-डे मील के निरीक्षण के दौरान अधिकतर स्कूलों में बच्चों की सेहत से खिलवाड़ साफ नजर आया। निरीक्षण टीम के साथ मौजूद अमर उजाला की टीम ने जो देखा वह वाकई बेहद गंभीर मामला है।
सुबह 9 बजे: निरीक्षण टीम के साथ जब राजकीय राघुनाथ राय शर्मा प्राथमिक स्कूल गंज जसपुर खुर्द पहुंचे तो स्कूल के किचन में पक रहे भोजन में बरसाती पानी टपक रहा था। स्कूली बच्चे टपकती छत के नीचे कमरे में पढ़ रहे थे। इतना ही नहीं कक्ष में ही मिड-डे मील के चावल स्टोरेज किए हुए थे। मसाले पन्नियों में रखे थे। दाल की स्थिति भी खासी खराब थी।
सुबह 9.30 बजे: राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय जसपुर खुर्द में भोजन माताएं मिड-डे मील का भोजन तैयार कर रही थीं। चावल की स्थिति तो ठीक पाई गई, लेकिन यहां भी मसाले दोयम दर्जे के थे। गंदगी में भंडारण की व्यवस्था व्यवस्था थी।
सुबह 10 बजे: राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रेलवे टांडा उज्जैन किचन की हालत बेहद खराब थी। टीन से टपकते पानी से किचन में टीम का खड़ा तक होना मुश्किल हो गया। इसी किचन में रखा मिड-डे मील का राशन भी भीग रहा था। जिस स्थान में बच्चों को भोजन खिलाया जाता है वहां भी सीलन से छत टपकती रहती है। सुबह 10.15 बजे: बिहारी लाल कश्यप प्राथमिक विद्यालय महेशपुरा, स्कूल में मिडे-डे मील का खाना खाते बच्चे मिले। जब टीम ने भंडारण कक्ष का निरीक्षण किया तो वहां चूहे भागते हुए मिले। जिस ड्रम में चावल रखे थे। उसके ऊपर चूहों का मल पड़ा हुआ था। बच्चों के खाने में दाल कम पानी अधिक दिखाई दिया।
समय 10.30 बजे: लाल बहादुर शास्त्री जूनियर हाईस्कूल में एक भी बच्चा मौजूद नहीं था। शिक्षकों ने बताया कि बरसात के चलते बच्चे नहीं आए। निरीक्षण में किचन देखा गया तो किचन में नाली का पानी घुस रहा था। खाने के तेल से बदबू आ रही थी।
समय 10.45 बजे: सुदामा लाल जूनियर हाईस्कूल, सभी व्यवस्था लगभग ठीक थी, लेकिन खाने वाले 32 बच्चों के लिहाज से मात्र 1 किलो दाल व चार किलो चावल बनाए गए थे। जो मानक के अनुसार कम थे। स्टोर में चूहे भी इधर-उधर भागते दिखे। भंडारण कक्ष में गंदगी पाई गयी।

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